‘मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया…’ इस्तीफा देकर रोने लगे GST उपायुक्त प्रशांत सिंह, जानें रिजाइन के बताया कि......

अयोध्या के GST उपायुक्त प्रशांत सिंह ने सीएम योगी के समर्थन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में भावुक होकर इस्तीफा दिया। वायरल वीडियो और 6 बिंदुओं वाला रिजाइन लेटर चर्चा में है।

‘मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया…’ इस्तीफा देकर रोने लगे GST उपायुक्त प्रशांत सिंह, जानें रिजाइन के बताया कि......
  • GST उपायुक्त प्रशांत सिंह का भावुक इस्तीफा, वीडियो वायरल
  • सीएम योगी के समर्थन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में कदम
  • रिजाइन लेटर में संविधान, लोकतंत्र और जातिवाद पर गंभीर आरोप


अयोध्या से सामने आई एक भावुक और सियासी रूप से संवेदनशील घटना ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। GST उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। इस्तीफे के दौरान वह इतने भावुक हो गए कि मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो पड़े, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

प्रशांत कुमार सिंह ने यह इस्तीफा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजा है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में यह कदम उठा रहे हैं।

डिप्टी कमिश्नर ने इस्तीफा देने के बाद पत्नी से फोन पर बात की। वे भावुक हो गए।

इस्तीफे की वजह उन्होंने 6 बिंदुओं में विस्तार से लिखी है। पहले बिंदु में उन्होंने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा यूपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को संविधान और लोकतंत्र के विरुद्ध बताया है। उन्होंने लिखा कि इन बयानों से वह व्यक्तिगत रूप से आहत हैं।

दूसरे और तीसरे बिंदु में उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए जा रहे हैं और भोले-भाले अधिकारियों को सरकार के विरुद्ध भड़काया जा रहा है, जो एक सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है।

डिप्टी कमिश्नर की आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने कहा- मैं पिछली दो रातों से सो नहीं पा रहा हूं।

चौथे बिंदु में प्रशांत सिंह ने लिखा कि जातिवाद का जहर घोलकर देश और प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनका मन व्यथित है। पांचवें बिंदु में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह उत्तर प्रदेश सरकार के वेतनभोगी कर्मचारी हैं और मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां उन्हें स्वीकार नहीं हैं।

अंतिम बिंदु में उन्होंने लिखा कि वह राज्य कर्मचारी नियमावली का पालन करने वाले निष्ठावान अधिकारी हैं और जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, तब तक वह पूरी निष्ठा से राजस्व वृद्धि हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे

इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ राजनीतिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी तीखी बहस छिड़ गई है।