पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी का निधन, 55 साल की उम्र में हार्ट अटैक से मौ*त

हरियाणा के यमुनानगर से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी का 55 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।

पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी का निधन, 55 साल की उम्र में हार्ट अटैक से मौ*त

पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी का हार्ट अटैक से निधन

55 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, कांग्रेस में शोक की लहर

कुमारी सैलजा के करीबी माने जाते थे, 2009 में बने थे विधायक

हरियाणा के यमुनानगर से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी का सोमवार सुबह अचानक निधन हो गया। परिजनों के अनुसार, सुबह उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी और हार्ट अटैक आने से उनका निधन हो गया।

उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

55 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

राजपाल भूखड़ी 55 वर्ष के थे। उनका जन्म 19 मई 1971 को तत्कालीन अंबाला जिले, वर्तमान यमुनानगर के गांव भूखड़ी में हुआ था। बाद में वह यमुनानगर के सेक्टर-17 में परिवार के साथ रहने लगे।

उन्हें यमुनानगर और साढौरा क्षेत्र के प्रमुख दलित नेताओं में गिना जाता था। लंबे समय तक उन्होंने कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई।

2009 में पहली बार विधायक बने

राजपाल भूखड़ी का राजनीतिक सफर कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ा रहा। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें साढौरा (आरक्षित) सीट से उम्मीदवार बनाया।

उन्होंने चुनाव में 47,263 वोट हासिल कर जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। विधायक के रूप में उन्होंने किसानों, सिंचाई, सड़क, बिजली, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में मजबूती से उठाया।

साढौरा में बनाई अलग पहचान

राजपाल भूखड़ी ने साढौरा क्षेत्र में विकास कार्यों और जनता के बीच सक्रियता के चलते अपनी अलग पहचान बनाई। विधायक न रहने के बाद भी वे लगातार क्षेत्रीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

वे जनसभाओं, पार्टी बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों में लगातार भाग लेते रहे और क्षेत्र के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय रखते थे।

2014 में चुनाव हारे, 2019 में टिकट कटने से हुए नाराज

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया, लेकिन इस बार उन्हें भाजपा उम्मीदवार बलवंत सिंह से हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद वर्ष 2019 में टिकट नहीं मिलने पर वह पार्टी नेतृत्व और खासतौर पर कुमारी सैलजा से नाराज बताए गए थे। हालांकि बाद के वर्षों में वे फिर से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई दिए।

राज्यसभा चुनाव में भी जताई थी नाराजगी

वर्ष 2026 के राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे पार्टी के साथ विश्वासघात करार दिया था।

उनके निधन से साढौरा और यमुनानगर की राजनीति में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।