डीसीआरयूएसटी मुरथल में सुविधाओं को लेकर छात्रों का बड़ा आरोप
डीसीआरयूएसटी मुरथल में छात्रों और अभिभावकों ने AC, इंटरनेट, हॉस्टल, लैब और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन से सुधार और पारदर्शिता की मांग की गई है।
डीसीआरयूएसटी मुरथल में छात्रों ने उठाए बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल
सेंट्रल AC, इंटरनेट, हॉस्टल और लैब सुविधाओं को लेकर बढ़ी नाराजगी
छात्रों और अभिभावकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
हरियाणा के दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल में एक बार फिर आधारभूत सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 25 मई से 25 जून 2026 तक विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जाहिर की है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि विश्वविद्यालय की छवि एक प्रतिष्ठित राज्य विश्वविद्यालय की है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि लाखों रुपये फीस और अन्य शुल्क लेने के बावजूद छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक और रहने की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अनेक पद खाली पड़े हैं। इससे छात्रों को शैक्षणिक मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और शोध कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता और प्लेसमेंट पर भी पड़ रहा है।
छात्रों और अभिभावकों ने यह भी आशंका जताई कि यदि हालात नहीं सुधरे तो इसका असर विश्वविद्यालय की NAAC रैंकिंग, शोध अवसरों, उद्योगों के साथ सहयोग और सरकारी फंडिंग पर भी पड़ सकता है।
सबसे बड़ा मुद्दा विश्वविद्यालय के सेंट्रल एयर कंडीशनिंग सिस्टम को लेकर उठाया गया है। छात्रों का दावा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना सेंट्रल AC सिस्टम पिछले करीब तीन वर्षों से बंद पड़ा है। हरियाणा की भीषण गर्मी में छात्रों को बिना पर्याप्त कूलिंग व्यवस्था के पढ़ाई और रहना पड़ रहा है।
इंटरनेट सुविधाओं को लेकर भी छात्रों में नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल इंटरनेट शुल्क देने के बावजूद लाइब्रेरी और रीडिंग हॉल में इंटरनेट सेवा लंबे समय से प्रभावित है। कई रीडिंग हॉल में AC और पंखे भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे, जिससे पढ़ाई में दिक्कत हो रही है।
विश्वविद्यालय के हॉस्टलों को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई है। छात्रों के अनुसार BH1 और BH2 हॉस्टलों की स्थिति खराब और असुरक्षित है। उन्होंने भवनों के रखरखाव, सफाई व्यवस्था और गर्मी में कूलिंग सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। छात्रों ने आशंका जताई कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
हॉस्टल और मेस फंड की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल फंड और खर्चों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाता। छात्र प्रतिनिधित्व और पारदर्शी ऑडिट की मांग भी उठाई गई है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल और लाइब्रेरी सिक्योरिटी रिफंड पिछले करीब तीन वर्षों से लंबित हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
प्रयोगशालाओं और प्रैक्टिकल सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। छात्रों का कहना है कि कई लैब्स में आधुनिक उपकरण, आवश्यक केमिकल्स और तकनीकी संसाधनों की कमी है। इससे छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा।
विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी छात्रों ने चिंता जताई। उनका आरोप है कि कई बार अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं और रात के समय डॉक्टर भी मौजूद नहीं रहते। इतना ही नहीं, पिछले तीन वर्षों से विश्वविद्यालय में एम्बुलेंस सुविधा तक उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।
खेल सुविधाओं को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि स्विमिंग पूल, जिम, बैडमिंटन कोर्ट, टेनिस कोर्ट और अन्य खेल सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उनका रखरखाव ठीक तरीके से नहीं हो रहा। कई मशीनें खराब हैं और खेल मैदानों की स्थिति भी खराब बताई जा रही है।
NCC ग्राउंड की स्थिति को लेकर भी छात्रों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय तक रखरखाव नहीं हुआ और केवल वीआईपी दौरे से पहले अस्थायी सफाई और मरम्मत करवाई गई।
कैंपस के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को लेकर भी छात्रों ने एकाधिकार जैसी स्थिति का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सीमित दुकानों के कारण छात्रों को अधिक कीमतों पर सामान खरीदना पड़ता है।
छात्रों ने दावा किया कि पिछले वर्षों में कई बार छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन और हड़तालें भी की गईं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
छात्रों और अभिभावकों ने हरियाणा सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने खाली पद भरने, हॉस्टलों की मरम्मत, इंटरनेट और AC सुविधाएं बहाल करने, लैब्स सुधारने, खेल सुविधाओं का रखरखाव बेहतर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की मांग उठाई है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि सर छोटूराम और दीनबंधु की विचारधारा पर स्थापित इस विश्वविद्यालय को शिक्षा, शोध और नवाचार का मॉडल संस्थान बनना चाहिए, न कि अव्यवस्था और अधूरी सुविधाओं का प्रतीक।
pooja