बाल धोना शुभ, बाल कटवाना वर्जित, बसंत पंचमी के नियम जानिए

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बाल धोना शुभ, बाल कटवाना वर्जित, बसंत पंचमी के नियम जानिए

बसंत पंचमी पर पढ़ाई और बाल धोना शुभ, विद्या आरंभ का श्रेष्ठ दिन
बाल कटवाना और तामसिक भोजन वर्जित, ऊर्जा क्षय की मान्यता
पीली वस्तुओं और शिक्षा सामग्री का दान देता है अक्षय पुण्य



वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक बसंत पंचमी पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन को विद्या और कला की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य पूरे वर्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

त्योहार से पहले लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या पढ़ाई करनी चाहिए, बाल धोना शुभ है या नहीं, और क्या खाना वर्जित है। ज्योतिषाचार्यों और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन ज्ञान, सात्विकता और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है।

पढ़ाई करना अत्यंत शुभ:  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन पढ़ाई करना बहुत शुभ माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन पढ़ाई शुरू करने से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बौद्धिक विकास बढ़ता है। पूजा के समय पुस्तकों और कलम को मां सरस्वती के चरणों में अर्पित करने से उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बाल धोना शुभ, लेकिन बाल कटवाना वर्जित:  बसंत पंचमी के दिन बाल धोने की कोई मनाही नहीं है। पूजा से पहले स्नान और शुद्धि को शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बाल धोने से पवित्रता और सकारात्मकता बढ़ती है। हालांकि बाल कटवाना और नाखून काटना वर्जित बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ तिथियों पर क्षौर कर्म करने से शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।

भोजन में सात्विकता अनिवार्य: बसंत पंचमी पीले रंग को समर्पित पर्व है। इस दिन सात्विक और पीले रंग के भोजन का विशेष महत्व होता है। मां सरस्वती को केसरिया भात, मीठे चावल, बेसन के लड्डू, बूंदी और पीले फल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूरी रखने की परंपरा है। मान्यता है कि तामसिक भोजन से मन चंचल होता है और पूजा में बाधा आती है।

शिक्षा सामग्री का दान देता है विशेष फल बसंत पंचमी पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, किताब, पेन, पेंसिल या स्कूल बैग का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अलावा पीले वस्त्र, हल्दी या चने की दाल का दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और जीवन में ज्ञान व सौभाग्य की वृद्धि होती है।