बार-बार कम हीमोग्लोबिन? फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर?

बार-बार हीमोग्लोबिन कम आना एनीमिया का संकेत हो सकता है। जानिए आयरन की कमी, गर्भावस्था और प्रजनन स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है।

बार-बार कम हीमोग्लोबिन? फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर?

ब्लड टेस्ट में बार-बार हीमोग्लोबिन कम आ रहा है तो वजह जानना जरूरी
एनीमिया का असर गर्भावस्था और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, खासकर आयरन की कमी में
सिर्फ आयरन की गोली नहीं, बार-बार खून की कमी होने पर डॉक्टर से कारण की जांच कराना जरूरी

हेल्थ डेस्क। ब्लड टेस्ट में बार-बार हीमोग्लोबिन कम आना सिर्फ कमजोरी या थकान की वजह नहीं हो सकता। शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया कई कारणों से हो सकता है और लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एनीमिया में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या बार-बार होने वाला एनीमिया प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। खासकर महिलाओं में गर्भधारण और गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी को लेकर यह चिंता ज्यादा रहती है।

एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता।

आयरन की कमी एनीमिया का एक प्रमुख कारण है, लेकिन हर एनीमिया को सिर्फ आयरन की कमी मानना सही नहीं है। WHO के अनुसार संक्रमण, सूजन, पुरानी बीमारियां, फोलेट या विटामिन B12 की कमी, खून की कमी और कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी एनीमिया का कारण बन सकती हैं।

इसलिए यदि किसी व्यक्ति के ब्लड टेस्ट में लगातार हीमोग्लोबिन कम आ रहा है तो सिर्फ खान-पान बदलने या बिना सलाह आयरन की दवा लेने के बजाय इसकी वजह की जांच कराना ज्यादा जरूरी है।

महिलाओं में खतरा ज्यादा क्यों देखा जाता है।

महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव, गर्भावस्था और शरीर की बढ़ी हुई पोषण संबंधी जरूरतों के कारण आयरन की कमी का जोखिम बढ़ सकता है।

WHO के मुताबिक 15 से 49 वर्ष की गैर-गर्भवती महिलाओं में 120 ग्राम प्रति लीटर यानी 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम हीमोग्लोबिन को एनीमिया की सीमा माना जाता है। गर्भावस्था में यह सीमा अलग होती है और उम्र, गर्भावस्था की स्थिति, ऊंचाई तथा धूम्रपान जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है।

इसलिए हर व्यक्ति के लिए एक ही हीमोग्लोबिन संख्या को एनीमिया का अंतिम पैमाना मानना सही नहीं है।

क्या एनीमिया से फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है।

एनीमिया और फर्टिलिटी के बीच संबंध को लेकर सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। हालांकि गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली आयरन की कमी और एनीमिया स्वास्थ्य तथा गर्भावस्था के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

खासकर गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलेट की पर्याप्त मात्रा मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण होती है। WHO के अनुसार गर्भावस्था में आयरन और फोलिक एसिड की कमी मातृ एनीमिया के साथ-साथ कम वजन के बच्चे और समय से पहले प्रसव जैसे प्रतिकूल परिणामों के जोखिम से जुड़ी है।

इसका मतलब यह नहीं है कि एनीमिया होने पर हर महिला को गर्भधारण में परेशानी होगी। प्रजनन क्षमता पर असर व्यक्ति की स्थिति, एनीमिया की वजह, उसकी गंभीरता और दूसरे स्वास्थ्य कारकों पर निर्भर करता है।

पुरुषों में भी हो सकती है समस्या।

एनीमिया सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में भी लगातार कम हीमोग्लोबिन किसी पोषण संबंधी कमी, रक्तस्राव, पुरानी बीमारी या अन्य कारणों का संकेत हो सकता है।

इसलिए पुरुषों में भी बार-बार हीमोग्लोबिन कम आने पर इसकी वजह की जांच जरूरी है। केवल इसे फर्टिलिटी की समस्या मान लेना या खुद से आयरन लेना उचित नहीं है।

गर्भावस्था में आयरन पर विशेष ध्यान।

गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से ज्यादा आयरन की जरूरत होती है। WHO गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन और फोलिक एसिड की दैनिक सप्लीमेंटेशन की सलाह देता है, ताकि मातृ एनीमिया और आयरन की कमी के जोखिम को कम किया जा सके।

हालांकि आयरन की गोली की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करनी चाहिए। हर व्यक्ति में एनीमिया का कारण एक जैसा नहीं होता और जरूरत से ज्यादा आयरन लेना भी उचित नहीं है।

डाइट में आयरन वाली चीजें शामिल करें।

खाने में आयरन से भरपूर चीजों को शामिल करना एनीमिया से बचाव में मददगार हो सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीन्स, नट्स और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

यदि ब्लड टेस्ट में बार-बार हीमोग्लोबिन कम आ रहा है तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार CBC, आयरन स्टडी, फेरिटिन और अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। खासकर महिलाओं में ज्यादा मासिक रक्तस्राव, गर्भावस्था या लंबे समय से कमजोरी जैसी स्थिति हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जरूरी बात: बार-बार एनीमिया का मतलब हमेशा आयरन की कमी नहीं होता। इसलिए रिपोर्ट देखकर खुद से दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।