हरियाणा की एक और बेटी एशियन गेम्स में चमकी, आशिमा अहलावत ने शॉट गन में जीता रजत पदक
रोहतक की आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स में महिला ट्रैप टीम इवेंट में रजत पदक जीता। मां ने संघर्ष और पढ़ाई से जुड़ी शर्त की कहानी बताई।
➤ नीरू धांडा और मनीषा कीर के साथ मिलकर भारत को दिलाया सिल्वर
➤ मां बोलीं- मुकाबला बहुत कठिन था, लेकिन बेटी ने देश और प्रदेश का नाम रोशन किया
➤ 98.6 प्रतिशत अंकों के बाद मिली थी शूटिंग की अनुमति, अब एशियन गेम्स में पदक जीतकर बढ़ाया मान
रोहतक। रोहतक जिले के खरकड़ा गांव की निशानेबाज आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला शूटिंग ट्रैप टीम इवेंट में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। आशिमा ने नीरू धांडा और मनीषा कीर के साथ मिलकर भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। भारतीय टीम ने 328 अंक हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक अपने नाम किया। चीन ने 346 अंक के साथ स्वर्ण और कुवैत ने 325 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
आशिमा की इस उपलब्धि के बाद खरकड़ा गांव और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। बेटी की सफलता पर परिवार को गर्व है और उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया है। आशिमा के परिवार ने बताया कि उनकी इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अभ्यास और कई चुनौतियों से गुजरने का सफर रहा है।
शूटिंग का सपना कैसे शुरू हुआ।
आशिमा का जन्म 27 सितंबर 2003 को हुआ था। साल 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाजों के प्रदर्शन से उन्हें शूटिंग में आने की प्रेरणा मिली। मनु भाकर और हीना सिद्धू के प्रदर्शन ने उनके मन में निशानेबाज बनने का सपना जगाया।
आशिमा की मां सुमित्रा अहलावत ने बताया कि उन्होंने हमेशा बेटी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने शर्त रखी थी कि अगर आशिमा 12वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल करती हैं, तभी उन्हें शूटिंग में आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। आशिमा ने इस शर्त को पूरा करते हुए 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए और इसके बाद दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला लिया। इस 98.6 प्रतिशत वाली उपलब्धि की स्वतंत्र पुष्टि एक सितंबर 2026 की पूर्व रिपोर्टों में भी मिलती है।
पिस्टल से शुरू हुआ सफर, फिर ट्रैप शूटिंग को बनाया लक्ष्य।
सुमित्रा अहलावत के अनुसार, आशिमा ने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत 10 मीटर एयर पिस्टल से की थी। बाद में पूर्व भारतीय निशानेबाज रंजन सोढ़ी की सलाह पर उन्होंने शॉटगन ट्रैप शूटिंग को अपना लिया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उनकी मां भी रोहतक से दिल्ली चली गईं।
परिवार के मुताबिक, शुरुआती दौर में आशिमा के लिए पहली शॉटगन और पर्याप्त कारतूस जुटाना भी आसान नहीं था। इन्हें जुटाने में करीब आठ महीने का समय लगा। इसके बावजूद आशिमा ने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
हार से सीखा और की शानदार वापसी।
आशिमा के करियर में ऐसे मौके भी आए जब सफलता बेहद करीब आकर हाथ से निकल गई। 2024 में पेरू में हुई विश्व चैंपियनशिप में गणना संबंधी गलती के कारण वह अंतिम टारगेट से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं। उन्होंने इस निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और अपनी गलतियों पर काम किया।
इसके कुछ ही सप्ताह बाद दिल्ली में आयोजित विश्व विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने मजबूत वापसी की। इस प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी जीते थे दो पदक।
आशिमा ने पिछले वर्ष अगस्त में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने महिला ट्रैप टीम इवेंट में स्वर्ण पदक और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। अपने शूटिंग करियर में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग को भी वह महत्वपूर्ण मानती हैं।
अब एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड और मजबूत हुआ है। ताजा एशियन गेम्स परिणामों के अनुसार महिला ट्रैप टीम में भारत की ओर से नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने मिलकर 328 अंक हासिल किए। आशिमा ने 106 और मनीषा ने 104 अंक का योगदान दिया, जबकि नीरू ने 118 अंक बनाए।
मां बोलीं- मुकाबला बहुत कठिन था।
आशिमा की मां सुमित्रा अहलावत ने बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि मुकाबला काफी कठिन था, लेकिन आशिमा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी पदक जरूर हासिल करेगी और आशिमा ने अपनी मेहनत से यह उम्मीद पूरी कर दी।
सुमित्रा ने कहा कि आशिमा की इस उपलब्धि से देश और प्रदेश दोनों का नाम रोशन हुआ है। उन्होंने बताया कि आशिमा 2 अक्टूबर को वापस लौटेंगी और उनके घर पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया जाएगा।
आशिमा का लक्ष्य अब आगे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करना है। परिवार को उम्मीद है कि एशियन गेम्स का यह रजत पदक उनके सफर को नई दिशा देगा और आने वाले समय में वह ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने में सफल होंगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने दी बधाई।
आशिमा की उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से भी बधाई संदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने महिला ट्रैप टीम के रजत पदक को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया और आशिमा अहलावत तथा नीरू धांडा की सफलता को हरियाणा के लिए विशेष गर्व का विषय बताया। यह मुख्यमंत्री के सार्वजनिक संदेश का वर्णन है, न कि स्वतंत्र राजनीतिक मूल्यांकन।
घर लौटने पर होगा भव्य स्वागत।
परिवार और क्षेत्र के लोगों ने आशिमा की उपलब्धि पर खुशी जताई है। परिजनों के मुताबिक, 2 अक्टूबर को आशिमा के घर लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। छोटे भाई धैर्य ने भी बहन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि आशिमा के मेडल जीतने से पूरा परिवार बेहद खुश है और घर लौटने पर उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा।
आशिमा की कहानी सिर्फ एक पदक जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि लगातार मेहनत, परिवार के सहयोग, अनुशासन और असफलता से सीख लेकर वापसी करने की कहानी भी है। रोहतक की इस बेटी ने एशियन गेम्स में रजत पदक जीतकर अपने गांव, परिवार और प्रदेश को गर्व करने का मौका दिया है।
Akhil Mahajan