कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा का दम,भारत केलिये 7 स्वर्ण समेत11 पदक जीतकर बढ़ाया प्रदेश का गौरव

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में हरियाणा के खिलाड़ियों ने 11 पदक जीते। सरकार ने 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये पुरस्कार देने की जानकारी दी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा का दम,भारत केलिये 7 स्वर्ण समेत11 पदक जीतकर बढ़ाया प्रदेश का गौरव

हरियाणा के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में जीते 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक
➤ भारत के 39 पदकों में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान 11 पदकों का रहा
➤ 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई

चंडीगढ़। हरियाणा की मिट्टी में खेल और खिलाड़ियों की मेहनत की एक अलग पहचान है। ग्लासगो में आयोजित 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 39 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं हरियाणा के खिलाड़ियों ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य सहित कुल 11 पदक अपने नाम किए। हरियाणा सरकार के अनुसार, भारत के कुल पदकों में प्रदेश के खिलाड़ियों की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत से अधिक रही।

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक ग्लासगो, स्कॉटलैंड में हुआ था। यह कॉमनवेल्थ गेम्स का 23वां संस्करण था। प्रतियोगिता में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य यानी कुल 39 पदक जीते। इस पदक तालिका में हरियाणा के खिलाड़ियों की उपलब्धि खास रही और प्रदेश ने भारत के कुल पदकों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुक्केबाजी में हरियाणा का दबदबा, भारत के सात में छह स्वर्ण प्रदेश के खिलाड़ियों के नाम

हरियाणा के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की बात करें तो मुक्केबाजी में प्रदेश की खास छाप देखने को मिली। भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीते, जिनमें से छह स्वर्ण पदक हरियाणा के खिलाड़ियों के खाते में आए।

प्रीति पवार, जैस्मिन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने अपने-अपने मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। इसके अलावा पैरा-एथलेटिक्स में शर्मिला ने स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा के स्वर्णिम अभियान को और मजबूत किया।

प्रदेश के लिए नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में रजत पदक हासिल किया, जबकि मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने भी रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या में योगदान दिया। सीमा कालीरमन ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

हरियाणा सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के कुल 11 पदकों में 6 पदक बेटियों के नाम होने और उनमें पांच स्वर्ण पदक शामिल होने को भी रेखांकित किया है।

खिलाड़ियों की सफलता के पीछे परिवार, प्रशिक्षकों और सुविधाओं की भी भूमिका

इन उपलब्धियों के पीछे केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत मेहनत ही नहीं, बल्कि परिवार, प्रशिक्षकों, प्रशिक्षण सुविधाओं और खेल से जुड़ी सरकारी योजनाओं की भूमिका भी रही है। हरियाणा सरकार का कहना है कि खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से तैयार करने, उन्हें आर्थिक सहायता देने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी खिलाड़ियों की सफलता को उनकी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से जोड़ा है। सरकार के अनुसार, खिलाड़ियों को बेहतर माहौल देने के साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले करीब 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई है। इसके अलावा उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर देने की नीति के तहत अब तक 260 खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, बी और सी की सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को तैयारी के लिए अग्रिम राशि देने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी खिलाड़ी की ट्रेनिंग प्रभावित न हो। इसके साथ ही खेल पुरस्कार विजेताओं के मासिक मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है।

2,000 खेल नर्सरियों से तैयार की जा रही जमीनी स्तर की प्रतिभाएं

प्रदेश में जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें शुरुआती दौर से तैयार करने के लिए 2,000 खेल नर्सरियां खोली गई हैं। इनमें 8 से 14 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों के लिए 1,500 रुपये मासिक और 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए 2,000 रुपये मासिक छात्रवृत्ति का प्रावधान बताया गया है।

इसके अलावा प्रदेश में 25 आवासीय खेल अकादमियां भी संचालित की जा रही हैं। इन अकादमियों में खिलाड़ियों को प्रतिदिन 500 रुपये की दर से डाइट मनी देने की व्यवस्था है। सरकार की खेल नीति में शुरुआती स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है।

12 वर्षों में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुए करीब 1,100 करोड़

खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी बड़ी राशि खर्च की गई है। हरियाणा सरकार के अनुसार, पिछले करीब 12 वर्षों में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

वहीं खेल विभाग का बजट भी वर्ष 2013-14 के 163 करोड़ रुपये से बढ़कर 668.42 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार के अनुसार, खेल सुविधाओं में निवेश बढ़ाने का उद्देश्य प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराना है।

चोट के बाद वापसी के लिए पंचकूला में ए-स्टार केंद्र

खिलाड़ियों को चोट के बाद बेहतर उपचार और खेल में वापसी के लिए पंचकूला के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से ‘ए-स्टार’ उन्नत वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाने की जानकारी भी सरकार ने दी है।

सरकार के अनुसार, इस केंद्र का उद्देश्य खिलाड़ियों को चोट के बाद दोबारा प्रतिस्पर्धी स्तर पर लौटने में मदद करना है। आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण और पुनर्वास की सुविधाओं के जरिए खिलाड़ियों को चोट से उबरने के बाद मैदान पर वापसी के लिए तैयार करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

24 खिलाड़ियों को दिए गए 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये

कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद हरियाणा सरकार ने प्रदेश के पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों के सम्मान में राज्य स्तरीय समारोह भी आयोजित किया। 26 अगस्त 2026 को पंचकूला में आयोजित समारोह में 24 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए।

इससे पहले सरकार ने बताया था कि सात स्वर्ण पदक विजेताओं को 1.50-1.50 करोड़ रुपये, दो रजत पदक विजेताओं को 75-75 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेता को 50 लाख रुपये देने की व्यवस्था की गई थी।

इस सम्मान समारोह के जरिए कॉमनवेल्थ गेम्स में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।

2028, 2032 और 2036 ओलंपिक के लिए प्रतिभाओं को तैयार करने पर जोर

हरियाणा की खेल उपलब्धियों को लेकर सरकार ने आगे भी खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से तैयार करने और उन्हें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए प्रतिभाओं को तैयार करने की बात भी राज्य सरकार की ओर से कही गई है।

सरकार का फोकस जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें प्रशिक्षण देने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और आधुनिक खेल सुविधाओं से जोड़ने पर है। खेल नर्सरियों और आवासीय खेल अकादमियों के साथ-साथ पुरस्कार और सरकारी नौकरी की नीतियों को भी इसी व्यवस्था का हिस्सा बताया गया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता ने फिर दिखाया हरियाणा का खेल दम

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में हरियाणा के खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बात को सामने लाता है कि प्रदेश के खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

खिलाड़ियों की मेहनत के साथ परिवार और प्रशिक्षकों का सहयोग, खेल नर्सरियां, आवासीय अकादमियां, पुरस्कार योजनाएं और खेल ढांचे पर होने वाला निवेश इस पूरी व्यवस्था का हिस्सा हैं। ग्लासगो में 7 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य सहित 11 पदक जीतने की उपलब्धि ने प्रदेश की खेल प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर मजबूती से सामने रखा है।

हरियाणा सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से तैयार करने और उन्हें आधुनिक सुविधाएं देने पर जोर जारी रहेगा, ताकि 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक के लिए प्रदेश से नई खेल प्रतिभाएं तैयार की जा सकें।