अजग -गजब नेताओं की जगह लेंगे एआई मंत्री , अल्बानिया में भ्रष्टाचार को रोकने का ऐस एक्सपेरिमेंट जो कभी नहीं हुआ ,जानें
अल्बानिया ने इतिहास रचते हुए दुनिया का पहला एआई मंत्री नियुक्त किया है। यह मंत्री सरकारी टेंडरों और फंडिंग की निगरानी करेगा और भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रयास करेगा। क्या मशीनें सचमुच इंसान से ज्यादा ईमानदार साबित होंगी?
- दुनिया का पहला एआई मंत्री बना अल्बानिया का गुप्त हथियार
- सरकारी टेंडरों और फंडिंग पर मशीन की निगरानी, इंसान का हस्तक्षेप खत्म
- भ्रष्टाचार पर वार, 2030 तक यूरोपीय संघ में शामिल होने का लक्ष्य
दुनिया की राजनीति और तकनीक में शायद ही कभी ऐसा चौंकाने वाला कदम देखने को मिला हो। छोटे से यूरोपीय देश अल्बानिया ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी बड़े-बड़े राष्ट्र सिर्फ बैठकों और रिपोर्टों में करते रहे हैं। सरकार ने दुनिया का पहला एआई मंत्री नियुक्त किया है, और उसका एकमात्र मिशन है—भ्रष्टाचार का सफाया।
लंबे समय से अल्बानिया में सरकारी टेंडरों और फंडिंग में गड़बड़ियों की गूंज सुनाई देती रही है। ठेके पाने के लिए रिश्वत, धमकियों और भाई-भतीजावाद का खेल चलता रहा। अब खेल के नियम बदलने वाले हैं, क्योंकि इंसानों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फैसले करेगा। हर कंपनी की बोली की बारीकी से समीक्षा होगी, बिना किसी भावनात्मक दबाव या राजनीतिक झुकाव के।
सबसे अहम बात यह है कि यह एआई मंत्री सिर्फ ठेकों पर नजर नहीं रखेगा, बल्कि आने वाले वक्त में पूरे सरकारी तंत्र की गतिविधियों पर डिजिटल पहरा बैठ जाएगा। किसी भी योजना में गड़बड़ी, किसी भी प्रोजेक्ट में लापरवाही—सब कुछ मशीन की निगाह से बच पाना नामुमकिन होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रयोग केवल अल्बानिया के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है। अगर यह मॉडल सफल हुआ तो भ्रष्टाचार से जूझ रहे देशों को भी नया रास्ता मिल जाएगा। और यह भी याद रखिए—अल्बानिया का बड़ा सपना है कि वह 2030 तक यूरोपीय संघ का हिस्सा बने। साफ है कि यह एआई मंत्री उसी सपने को हकीकत बनाने का तुरुप का इक्का है।
अब सवाल यह है कि क्या इंसानों की जगह मशीनों का हस्तक्षेप भ्रष्टाचार को सचमुच जड़ से मिटा पाएगा, या फिर यह प्रयोग भी अन्य कोशिशों की तरह अधूरा रह जाएगा?
Akhil Mahajan