हरियाणा में हाई लॉस फीडरों से बिजली संकट गहराया, वोल्टेज गिरने और बार-बार कटौती से उपभोक्ता परेशान
हरियाणा में हाई लॉस फीडर बिजली संकट की बड़ी वजह बन गए हैं। लाखों उपभोक्ताओं को बार-बार कटौती, वोल्टेज समस्या और ज्यादा बिल का सामना करना पड़ रहा है। सरकार और बिजली कंपनियां समाधान की कोशिश में जुटीं।
➤ हाई लॉस फीडरों से बिजली कंपनियों को बड़ा नुकसान
➤ उपभोक्ताओं को बार-बार कटौती और वोल्टेज समस्या
➤ सरकार ने सुधार के लिए बनाई नई कार्ययोजना
हरियाणा में बिजली की सप्लाई की सबसे बड़ी चुनौती हाई लॉस फीडर बन गए हैं। इनकी वजह से बिजली वितरण कंपनियों को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है और उपभोक्ताओं को भी स्थायी रूप से बिजली की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। वोल्टेज बार-बार गिरता है, ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है और कई बार घंटों तक बिजली गुल हो जाती है।
प्रदेश के 82.39 लाख से अधिक उपभोक्ता इस समस्या से प्रभावित हैं। जिन क्षेत्रों में हाई लॉस फीडर अधिक हैं, वहां उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। न सिर्फ उपकरण खराब होते हैं, बल्कि कम खपत के बावजूद बिजली बिल भी अधिक आता है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने खुद इस मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों की बैठक बुलाने की तैयारी की है ताकि पता लगाया जा सके कि किस क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हो रहा है और उसे कैसे कम किया जाए।
ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक नुकसान
यूएचबीवीएन (उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम) के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में 40% से अधिक नुकसान वाले 65 ग्रामीण फीडर दर्ज किए गए। इनमें रोहतक (33), सोनीपत (16), झज्जर (9) और कैथल (7) प्रमुख हैं। शहरी क्षेत्र में कैथल का एक फीडर ही 20% से अधिक नुकसान वाला दर्ज है।
दक्षिण हरियाणा (डीएचबीवीएन) में स्थिति और भी चिंताजनक है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 20% से अधिक नुकसान वाले 27 शहरी फीडर मिले, जिनमें जींद (14), पलवल (9), हिसार (3) और गुरुग्राम (1) शामिल हैं। वहीं 40% से अधिक नुकसान वाले ग्रामीण फीडरों की संख्या 293 रही। ताजा आंकड़े अप्रैल-जुलाई 2025 के अनुसार, यह संख्या और बढ़कर 299 हो गई है, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।
कंपनियों की कार्ययोजना
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डीएचबीवीएन ने छोटे कंडक्टर की जगह बड़े कंडक्टर लगाने शुरू किए हैं, चोरी प्रभावित क्षेत्रों में कंडक्टर की जगह केबल बिछाई जा रही है।
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11 केवी फीडरों पर अधिक भार होने की स्थिति में उन्हें अलग किया जा रहा है ताकि लोड कम हो सके।
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बढ़ते लोड को देखते हुए 33/11 केवी सबस्टेशनों का विस्तार और सुधार किया जा रहा है।
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यूएचबीवीएन ने हाई लॉस फीडरों की मॉनिटरिंग के लिए मासिक समीक्षा बैठकों की व्यवस्था की है और एमजीजेजी योजना के तहत सुधार कार्य किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यदि इन हाई लॉस फीडरों पर नियंत्रण पाया गया तो बिजली सप्लाई स्थिर और उपभोक्ता हित में होगी।