सोमवती अमावस्या पर ढोसी पर्वत में उमड़ा आस्था का सैलाब,पवित्र कुंडों में स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे
सोमवती अमावस्या पर नारनौल के ढोसी पर्वत में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।
सोमवती अमावस्या पर ढोसी पर्वत में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
हरियाणा के साथ राजस्थान से भी पहुंचे हजारों श्रद्धालु
पवित्र कुंडों में स्नान कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल स्थित दक्षिणी हरियाणा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ढोसी पर्वत पर सोमवती अमावस्या के अवसर पर सोमवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह करीब तीन बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और दिन चढ़ने के साथ पवित्र कुंडों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
हरियाणा के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु ढोसी पहुंचे। श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा अधिक रही। श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। मेला स्थल पर करीब 65 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे दिन व्यवस्था पर नजर बनाए रखी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सोमवती अमावस्या के अवसर पर ढोसी पर्वत की तलहटी में पारंपरिक मेले का आयोजन भी किया गया। मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न दुकानों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। स्नान के बाद श्रद्धालु च्यवन आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना करते नजर आए।
गांव कुलताजपुर के सरपंच विक्रम ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन ढोसी पर्वत के पवित्र कुंडों में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अरावली पर्वतमाला में स्थित ढोसी पर्वत महर्षि च्यवन की तपोस्थली है। यहां मौजूद प्राचीन कुंडों का जल अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन कुंडों में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ग्रामीण राहुल गुरैया ने बताया कि ढोसी के कुंडों के जल से चर्म रोगों में लाभ मिलने की भी मान्यता है। यही वजह है कि हरियाणा और राजस्थान के दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। विशेष रूप से सोमवती अमावस्या, चैत्र और कार्तिक मास में यहां विशाल मेलों का आयोजन होता है।
धार्मिक महत्व के साथ-साथ ढोसी पर्वत अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक पहचान के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित चंद्रकूप सहित कई प्राचीन जलकुंड श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। पूरे दिन स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
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