दिल्ली vs हिमाचल के बीच हरियाणा पुलिस का एंगल भी आया सामने, AI समिट के प्रदर्शनकारियों को दबोचने पहुंची थी टीम
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■ दिल्ली के साथ हरियाणा पुलिस कर्मियों की मौजूदगी की पुष्टि
■ शिमला पुलिस ने मेडिकल व ट्रांजिट रिमांड के बाद ही दी अनुमति
■ रिजॉर्ट मालिक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज, जांच जारी
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार तड़के हुई कार्रवाई ने अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। चांसल रिजॉर्ट, चिड़गांव से मिली सूचना के अनुसार कुछ लोग सादे कपड़ों में बाहरी राज्यों के वाहनों से पहुंचे और वहां ठहरे तीन युवकों को अपने साथ ले गए। उनके साथ डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर समेत कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी ले जाए जाने की बात सामने आई। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह टीम दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस के कर्मियों की थी, जो दिल्ली में दर्ज एक मामले के सिलसिले में आरोपियों का पीछा करते हुए हिमाचल पहुंची थी। यही हरियाणा एंगल अब इस पूरे प्रकरण को और संवेदनशील बना रहा है।
बता दें कि संयुक्त टीम दिल्ली में एआई समिट में टीशर्ट उतारकर प्रदर्शन करने वालों की धरपकड़ के लिए पहुंची थी। लेकिन हिमाचल पुलिस ने टीम को आरोपियों के साथ धर दबोचा। मामला सियासी रंग में रंग गया है, क्योंकि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है। विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि राहुल गांधी के इशारे पर हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दिल्ली और हरियाणा पुलिस को हिरासत में लिया। हालांकि देर रात कोर्ट में पेश होने के बाद ट्राजिंंट रिमांड मंजूर की गई।इ
शिमला पुलिस के अनुसार, बाहरी राज्य की पुलिस द्वारा बिना पूर्व सूचना कार्रवाई किए जाने से संशय की स्थिति बनी। तथ्यों की पुष्टि के लिए शिमला पुलिस ने सोलन पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर संबंधित दल को शोघी, आईएसबीटी शिमला और धर्मपुर समेत विभिन्न स्थानों पर रोका।
विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए तीनों युवकों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया। उनका मेडिकल परीक्षण रिपन अस्पताल, शिमला में कराया गया। इसके बाद एसीजेएम न्यायालय ने करीब 18 घंटे का ट्रांजिट रिमांड दिया। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही दिल्ली और हरियाणा पुलिस दल को आरोपियों को लेकर रवाना होने की अनुमति दी गई।
रिजॉर्ट स्वामी की शिकायत पर थाना चिड़गांव में एफआईआर संख्या 18/2026 दर्ज की गई है। मामले की जांच जारी है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि शिमला पुलिस विधि के अनुरूप कार्रवाई और अंतरराज्यीय समन्वय के प्रति प्रतिबद्ध है।
वहीं, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि किसी भी राज्य में कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और हिमाचल पुलिस ने वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित कराया। क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की चूक थी या अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय में गंभीर खामी? हरियाणा पुलिस की मौजूदगी ने मामले को और जटिल बना दिया है।
Akhil Mahajan