76 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल 6 दिन 'डिजिटल अरेस्ट' में रहीं, बेटे को डिपोर्ट करने की धमकी देकर ₹81 लाख ठगे

हरियाणा के हिसार में साइबर अपराधियों ने 76 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल को 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने के नाम पर 81 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने उनके विदेश में रह रहे बेटे को डिपोर्ट करने की धमकी भी दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है, जबकि साइबर एक्सपर्ट ने बताया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

76 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल 6 दिन 'डिजिटल अरेस्ट' में रहीं, बेटे को डिपोर्ट करने की धमकी देकर ₹81 लाख ठगे

रिटायर्ड प्रिंसिपल को मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर ठगा

➤ अपराधी ने 6 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 81 लाख रुपये लूटे

➤ साइबर एक्सपर्ट ने साफ किया डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं


हरियाणा के हिसार से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ साइबर अपराधियों ने वृद्धाश्रम में रह रहीं 76 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उनसे 81 लाख रुपये ठग लिए हैं। अपराधियों ने बुजुर्ग महिला को डराया कि उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर केस में फँसा दिया गया है और अगर उन्होंने उनकी बात नहीं मानी तो उन्हें गिरफ्तार कर 90 दिन के लिए जेल भेज दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ठगों ने उनकी सबसे बड़ी कमजोरी पर वार करते हुए यह भी धमकी दी कि उनके विदेश में रह रहे बेटे को डिपोर्ट कर दिया जाएगा, जिससे रिटायर्ड प्रिंसिपल पूरी तरह से डर के साए में आ गईं।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 6 नवंबर को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई थी, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली पुलिस से बताया। इसके बाद एक अन्य नंबर पर बात करने पर अपराधी ने खुद को आईपीएस विजन बताकर डराया और कहा कि उनके खिलाफ उक्त केस की जाँच चल रही है। महिला को झांसा दिया गया कि सत्यापन (verification) के बाद यह राशि 15 दिन में लौटा दी जाएगी। इसी झांसे में आकर बुजुर्ग महिला ने साइबर अपराधियों के खातों में RTGS के माध्यम से दो बार में 81 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। महिला 6 दिन तक खुद को डिजिटल अरेस्ट में मानकर भयभीत रहीं। ठगी का पता चलने पर महिला ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

इस मामले पर साइबर एक्सपर्ट और साइबर क्राइम थाने के एसएचओ कपिल सिंह ने लोगों को सचेत किया है। उन्होंने साफ किया है कि कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई चीज नहीं होती और सीबीआई या ईडी जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी वॉट्सऐप कॉल नहीं करती है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर वॉट्सऐप कॉल या मैसेज कर लोगों को किसी केस में फँसाने की धमकी देते हैं और पैसे ऐंठते हैं। एसएचओ ने सलाह दी कि ऐसी किसी भी कॉल पर संदेह होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस की मदद लेनी चाहिए और अगर ठगी हो जाए तो बिना देर किए 1930 साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।