PGIMS रोहतक में बनेगा हरियाणा का पहला पैलिएटिव केयर वार्ड
PGIMS रोहतक में हरियाणा का पहला 30 बेड का पैलिएटिव केयर वार्ड शुरू होगा, जहां गंभीर और अंतिम अवस्था के मरीजों को दर्द से राहत और सम्मानजनक देखभाल मिलेगी।
PGIMS रोहतक में बनेगा हरियाणा का पहला 30 बेड का पैलिएटिव केयर वार्ड
अंतिम अवस्था के मरीजों को मिलेगा दर्द से राहत और सम्मानजनक देखभाल
CM नायब सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के मार्गदर्शन में पहल
हरियाणा के पीजीआईएमएस रोहतक में गंभीर और अंतिम अवस्था के मरीजों के लिए एक बड़ी मानवीय पहल की जा रही है। संस्थान में जल्द ही राज्य का पहला 30 बेड का समर्पित पैलिएटिव केयर वार्ड शुरू किया जाएगा। यहां उन मरीजों को विशेष देखभाल दी जाएगी, जो जीवन के अंतिम चरण में असहनीय दर्द और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
यह सुविधा हरियाणा के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार शुरू होने जा रही है। इस पहल को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जा रहा है।
पीजीआईएमएस के कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने ऐसे मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाने का सुझाव दिया था, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं और असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं। इस सुझाव को तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि कई मरीज ऐसे होते हैं जो खाना नहीं खा पाते, लगातार दर्द में रहते हैं और परिवार भी घर पर उनकी समुचित देखभाल नहीं कर पाता। ऐसे मरीजों को अब सम्मानजनक और संवेदनशील देखभाल उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि पैलिएटिव केयर केवल इलाज नहीं, बल्कि मरीज के जीवन की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास है। इसमें दर्द, बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक पीड़ा को भी कम करने का प्रयास किया जाता है।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार आधुनिक चिकित्सा तकनीक मृत्यु को कुछ समय तक टाल सकती है, लेकिन मरीज को अनावश्यक पीड़ा देना उचित नहीं है। हर व्यक्ति को सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा, छोटे परिवार और न्यूक्लियर फैमिली के दौर में पैलिएटिव केयर अब जरूरत बन चुकी है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि इस वार्ड में मरीज सीधे भर्ती नहीं होंगे। पहले उन्हें सामान्य वार्ड में भर्ती किया जाएगा। जब इलाज कर रहे डॉक्टर को लगेगा कि बीमारी अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी है और अब दर्द निवारण व विशेष देखभाल की जरूरत है, तब मरीज को पैलिएटिव वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कैंसर, अंग फेलियर और बुढ़ापे की गंभीर अवस्था में कई मरीज दर्द से तड़पते रहते हैं। परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट जाता है। यह वार्ड ऐसे परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
इस वार्ड में मेडिसिन, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स और सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम मरीजों की देखभाल करेगी।
डॉ. मित्तल ने बताया कि अभी तक हरियाणा के किसी भी सरकारी अस्पताल में इस तरह की समर्पित सुविधा उपलब्ध नहीं है। पीजीआईएमएस रोहतक पहला संस्थान होगा, जहां एंड-ऑफ-लाइफ केयर को संस्थागत रूप दिया जाएगा।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अब चिकित्सा व्यवस्था केवल मृत्यु रोकने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीज की पीड़ा कम करने और उसे गरिमा के साथ अंतिम समय देने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
इस पैलिएटिव केयर वार्ड के शुरू होने से प्रदेश के हजारों गंभीर मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में इसे हरियाणा की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
pooja