पानीपत की टेक्सटाइल फैक्ट्री में दर्दनाक हादसा, केमिकल टैंक में उतरे चचेरे भाइयों की मौत

पानीपत की मयूर टेक्सटाइल फैक्ट्री में केमिकल टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दो चचेरे भाइयों की मौत, सुरक्षा लापरवाही के आरोप।

पानीपत की टेक्सटाइल फैक्ट्री में दर्दनाक हादसा, केमिकल टैंक में उतरे चचेरे भाइयों की मौत

■ बिना सेफ्टी किट जहरीले टैंक में उतारे गए मजदूर
■ दम घुटने से चचेरे भाइयों की मौके पर मौत
■ फैक्ट्री मालिक पर लापरवाही के गंभीर आरोप


हरियाणा के पानीपत जिले में एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। जलालपुर रोड स्थित मयूर टेक्सटाइल फैक्ट्री में गुरुवार को केमिकल टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई। मृतक दोनों आपस में चचेरे भाई बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है।

घटना उस समय हुई जब फैक्ट्री के भीतर एक केमिकल टैंक की सफाई का काम चल रहा था। आरोप है कि दोनों मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण, मास्क या ऑक्सीजन सिलेंडर के सीधे टैंक के अंदर उतार दिया गया। टैंक के भीतर पहले से जमा जहरीली गैस के संपर्क में आते ही उनका दम घुटने लगा और कुछ ही मिनटों में दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद अन्य श्रमिकों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और तुरंत सिविल अस्पताल पानीपत पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही से हुई मौत है। परिजनों का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया और मजदूरों की जान जोखिम में डाल दी। उनका कहना है कि यदि उचित सुरक्षा इंतजाम होते, तो दोनों की जान बच सकती थी।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह साफ हो रहा है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस की मात्रा अधिक थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। पुलिस अब फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा इंतजामों की जांच कर रही है।

यह पहली बार नहीं है जब पानीपत में इस तरह की घटना सामने आई हो। इससे पहले कुराड़ रोड स्थित गोरजा इंटरनेशनल फैक्ट्री में भी इसी तरह के हादसे में दो मजदूरों की जान गई थी। लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की जान इतनी सस्ती है कि उन्हें बिना सुरक्षा के मौत के मुंह में धकेल दिया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।