दीपालपुर आश्रम में कल ओशो का जन्मदिवस उत्सव, 700 साधक होंगे शामिल: डॉ. स्वामी शैलेंद्र सरस्वती

दीपालपुर स्थित ओशो फ्रैगरेंस आश्रम में कल ओशो का जन्मदिवस ध्यान, संगीत और चेतना के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने धर्म को प्रेम और शांति का मार्ग बताया।

दीपालपुर आश्रम में कल ओशो का जन्मदिवस उत्सव, 700 साधक होंगे शामिल: डॉ. स्वामी शैलेंद्र सरस्वती

  • दीपालपुर आश्रम में कल ओशो का जन्मदिवस विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाएगा

  • स्वामी शैलेंद्र सरस्वती बोले—धर्म प्रेम, शांति और चेतना की जागृति का मार्ग

  • ओशो फ्रैगरेंस आश्रम में 700 साधकों के जुटने की उम्मीद



सोनीपत के दीपालपुर स्थित ओशो फ्रैगरेंस आश्रम में कल ओशो का जन्मदिन बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर ओशो के भाई और प्रसिद्ध आध्यात्मिक विचारक डॉ. स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जो धर्म लड़ाई सिखाए, वह धर्म नहीं बल्कि राजनीति है। धर्म का वास्तविक स्वरूप मनुष्य को प्रेम, शांति और अध्यात्म की राह दिखाना है।

स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि आज की पीढ़ी मानसिक दबाव और बाहरी विकारों से घिरी हुई है। ऐसे में बच्चों को प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा ध्यान सिखाया जाना चाहिए, ताकि वे अपने मन को संतुलित और शांत रख सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओशो का गुरु-भाव अधिकार का नहीं बल्कि चेतना जगाने की प्रक्रिया है। गुरु किसी चमत्कार का केंद्र नहीं, बल्कि उसकी उपस्थिति ही शिष्य के जीवन में प्रकाश बन जाती है।

उन्होंने बताया कि ओशो ने गुरु को ऊंचे सिंहासन से उतारकर सहयात्री के रूप में स्वीकारा। शिष्य को अनुकरण की बेड़ियों से मुक्त कर स्वयं के बोध और उत्तरदायित्व की राह दिखाई। उनके अनुसार अध्यात्म त्याग या संघर्ष का मार्ग नहीं बल्कि नृत्य, आनंद और सहजता की यात्रा है।

स्वामी शैलेंद्र ने कहा कि ओशो के मत में धार्मिकता कोई बोझ नहीं बल्कि उत्सव है। बुद्ध के मैत्रेय अवतार की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ओशो ने वही मित्रवत गुरु-भाव साकार किया, जो भय नहीं बल्कि प्रेम सिखाता है।

उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर को ओशो फ्रैगरेंस आश्रम में विशेष उत्सव आयोजित किया जाएगा। लगभग 700 साधक इस कार्यक्रम में शामिल होकर ध्यान, संगीत और प्रेमपूर्ण ऊर्जा से भरपूर सत्रों का अनुभव करेंगे। ओशो के जन्मदिन को वे जागरण, आनंद और आंतरिक प्रकाश का पर्व मानते हैं।