NEET पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, बेटे के लिए खरीदा 10 लाख में पेपर
NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी ने CBI पूछताछ में खुलासा किया कि उसने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा था, फिर भी छात्र सिर्फ 107 अंक ला सका।
- NEET पेपर लीक केस में CBI के सामने आरोपी का बड़ा कबूलनामा
- बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए 10 लाख रुपये में खरीदा गया था लीक पेपर
- इतना पैसा खर्च करने के बावजूद छात्र ला सका सिर्फ 107 अंक
नई दिल्ली: देशभर में चर्चाओं में रहे NEET पेपर लीक केस की जांच कर रही CBI को बड़ी सफलता मिली है। मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल ने पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपी ने कबूल किया है कि उसने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए 10 लाख रुपये में परीक्षा का लीक पेपर खरीदा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने और परीक्षा से पहले पेपर मिलने के बावजूद उसका बेटा परीक्षा में केवल 107 अंक ही हासिल कर सका। आरोपी के इस खुलासे ने पूरे मामले को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
CBI सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दिनेश बिवाल ने माना कि वह अपने बेटे को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाना चाहता था। इसी वजह से उसने दलालों और पेपर लीक गिरोह के संपर्क में आकर लाखों रुपये खर्च किए। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि पेपर लीक नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किन राज्यों तक इसकी पहुंच थी।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल किया था। हालांकि, इसके बावजूद छात्र बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पेपर पहले से मौजूद था, तब भी छात्र अच्छे अंक क्यों नहीं ला सका।
CBI लगातार इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है। जांच के दौरान आर्थिक लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की भी गहन जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि NEET परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर यह परीक्षा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
इस मामले के सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और तकनीकी सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है।
Akhil Mahajan