190 KG उठाकर मीराबाई ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला गोल्ड; कॉमनवेल्थ में बनाया नया रिकॉर्ड
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर नया रिकॉर्ड बनाया और भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
➤ मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में जीता स्वर्ण पदक
➤ 190 किलोग्राम कुल वजन उठाकर बनाया नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड
➤ भारत को दिलाया गेम्स का पहला गोल्ड, पूरे दल में भरा नया जोश
जब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत अपने पहले स्वर्ण पदक का इंतजार कर रहा था, तब एक बार फिर मीराबाई चानू ने अपनी शानदार प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। महिलाओं की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया।
मीराबाई ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान उनका आत्मविश्वास और तकनीक पूरे मुकाबले में देखने लायक रही। अंतिम सफल प्रयास के साथ ही स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और भारत को प्रतियोगिता का पहला स्वर्ण पदक मिल गया।
दबाव में भी दिखाया चैंपियन वाला प्रदर्शन
बड़े मंच पर दबाव अक्सर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित करता है, लेकिन मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चुनौती जितनी बड़ी होती है, उनका प्रदर्शन उतना ही निखरकर सामने आता है। उन्होंने पूरे मुकाबले में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाए रखी और रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर विश्व मंच तक पहुंची मीराबाई की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। सीमित संसाधनों, कठिन प्रशिक्षण, चोटों से वापसी और वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने खुद को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वेटलिफ्टरों में शामिल किया है।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद पोडियम पर जब तिरंगा सबसे ऊपर लहराया और राष्ट्रगान बजा, तो वह पल पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बन गया।
भारतीय दल को मिला बड़ा मनोबल
किसी भी बड़े मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट में पहला गोल्ड पूरे दल का मनोबल बढ़ाता है। मीराबाई की इस ऐतिहासिक जीत ने अन्य भारतीय खिलाड़ियों में भी नया आत्मविश्वास और ऊर्जा भरने का काम किया।
बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
मीराबाई चानू की यह उपलब्धि उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में देश का नाम रोशन करने का सपना देखती हैं। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के आगे कोई लक्ष्य असंभव नहीं होता।
Akhil Mahajan