मनीषा मौत मामले में CBI ने सौंपी क्लोजर रिपोर्ट, जांच में आत्महत्या माना! 27 अगस्त को अगली सुनवाई, उठे सवाल
अध्यापिका मनीषा मौत मामले में CBI ने जांच पूरी कर पंचकूला स्पेशल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। शिकायतकर्ता संजय स्वामी को जानकारी दी गई।
➤ 11 महीने की जांच के बाद CBI ने पंचकूला विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की
➤ रिपोर्ट में मनीषा की मौत को आत्महत्या माना गया, पिता संजय ने निष्कर्ष स्वीकार करने से किया इनकार
➤ 27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, परिवार को रिपोर्ट और साक्ष्यों पर कानूनी लड़ाई की उम्मीद
भिवानी। अध्यापिका मनीषा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने के बाद दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। CBI ने पंचकूला स्थित स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, CBI की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक CBI की रिपोर्ट में मनीषा की मौत को आत्महत्या माना गया है। हालांकि मनीषा के पिता संजय इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं। शुक्रवार को पंचकूला की विशेष CBI अदालत में मामले की सुनवाई हुई और अब अगली सुनवाई 27 अगस्त को तय की गई है।
CBI की ओर से मामले के शिकायतकर्ता संजय स्वामी को 10 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर जांच पूरी होने और अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने की जानकारी दी गई थी। CBI के स्पेशल क्राइम-II, नई दिल्ली कार्यालय से जारी पत्र में बताया गया था कि शिकायत से संबंधित CBI केस संख्या RC0502025S0010 तथा थाना लोहारी, जिला भिवानी में दर्ज FIR संख्या 135/2025 की जांच पूरी हो चुकी है। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193 के तहत अंतिम रिपोर्ट पंचकूला स्थित CBI की विशेष अदालत में दाखिल की गई।
शुरुआत में सामने आई जानकारी के अनुसार CBI की ओर से 12 अगस्त 2026 को अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद अदालत में हुई प्रक्रिया से अब यह स्पष्ट हुआ है कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार CBI की क्लोजर रिपोर्ट में मामले को आत्महत्या माना गया है, जबकि मनीषा के पिता को अभी तक आत्महत्या से जुड़े सभी तथ्य उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
पिता बोले- बेटी की मौत को आत्महत्या नहीं मान सकते
मनीषा के पिता संजय शुक्रवार को पंचकूला स्थित CBI की विशेष अदालत पहुंचे। उनके अनुसार अदालत की ओर से उन्हें बताया गया कि CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है और उसमें मनीषा की मौत को आत्महत्या माना गया है। हालांकि उनका कहना है कि उन्हें अभी रिपोर्ट की पूरी कॉपी और उसमें शामिल सभी साक्ष्यों की जानकारी नहीं मिली है। उन्हें 27 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई के दौरान आगे की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
संजय ने कहा कि वह अपनी बेटी की मौत को आत्महत्या नहीं मानते। उनका कहना है कि यदि CBI की जांच से वे संतुष्ट नहीं हुए तो वह अदालत के सामने अपनी बात रखेंगे और कानूनी रास्ता अपनाएंगे। मामले में परिवार की ओर से शुरू से ही मनीषा की मौत को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक मनीषा के पिता का कहना है कि CBI देश की बड़ी जांच एजेंसी है, लेकिन यदि जांच उन्हें संतुष्ट नहीं करती तो वह न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने भी CBI की ओर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि मनीषा के पिता ने CBI से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।
19 वर्षीय मनीषा की मौत से शुरू हुआ था मामला
मनीषा ढाणी लक्ष्मण गांव की रहने वाली 19 वर्षीय अध्यापिका थीं। वह 11 अगस्त 2025 की सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकली थीं। 13 अगस्त को सिंघानी के खेतों में उनका शव मिला था। मौत के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई और शव लेने से इनकार कर दिया था। मामले को लेकर भिवानी में विरोध और महापंचायतों का दौर शुरू हुआ था।
14 अगस्त को परिजनों ने भिवानी जिला नागरिक अस्पताल में धरना दिया था। इसके बाद 16 अगस्त को लोहारू थाने के सभी कर्मचारियों को निलंबित किया गया और पुलिस अधीक्षक का तबादला किया गया। 18 अगस्त को सुसाइड नोट सामने आने के बाद मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा गया, लेकिन इससे परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद ढाणी लक्ष्मण में करीब सप्ताह भर तक महापंचायत चली। मनीषा के शव का रोहतक PGI के बाद एम्स दिल्ली में तीसरी बार पोस्टमार्टम भी कराया गया।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री की ओर से मामला CBI को सौंपे जाने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद 21 अगस्त को परिवार ने मनीषा का अंतिम संस्कार किया और 26 अगस्त को मामला CBI को सौंप दिया गया। 3 सितंबर को CBI की छह सदस्यीय टीम पहली बार गांव सिंघानी पहुंची और जांच शुरू की।
11 महीने चली CBI जांच के बाद आई क्लोजर रिपोर्ट
CBI ने करीब 11 महीने तक मामले की जांच की। इस दौरान परिवार लगातार जांच की स्थिति और मनीषा की मौत के कारण को लेकर जवाब मांगता रहा। 17 जून 2026 को ढाणी लक्ष्मण में पंचायत हुई थी। इसमें मनीषा के पिता संजय ने 29 जून को उपायुक्त कार्यालय पर आमरण अनशन करने का फैसला लिया था। हालांकि उन्हें भिवानी पहुंचने से पहले ही पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक की मध्यस्थता से संजय ने दिल्ली में CBI अधिकारियों से मुलाकात की थी।
13 अगस्त को मनीषा की मौत को एक साल पूरा हुआ। इसी मौके पर ढाणी लक्ष्मण में श्रद्धांजलि सभा भी आयोजित की गई थी। इसके ठीक बाद CBI की क्लोजर रिपोर्ट और अदालत की सुनवाई ने मामले को फिर से केंद्र में ला दिया।
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत क्या रुख अपनाती है। रिपोर्ट में आत्महत्या का निष्कर्ष सामने आने के बावजूद परिवार इस निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। 27 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में रिपोर्ट, जांच से जुड़े साक्ष्यों और परिवार की आपत्तियों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
Akhil Mahajan