फतेहाबाद में कुमारी सैलजा का सरकार पर निशाना — किसानों को मुआवजा कब?

हरियाणा के फतेहाबाद में सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार पर हमला बोला। कहा कि जलभराव से फसलें बर्बाद हो गईं, पर अब तक गिरदावरी पूरी नहीं हुई और किसानों को मुआवजा नहीं मिला। सैलजा ने विशेष गिरदावरी और राहत पैकेज की मांग की।

फतेहाबाद में कुमारी सैलजा का सरकार पर निशाना — किसानों को मुआवजा कब?

• फतेहाबाद में कुमारी सैलजा ने जलभराव से बर्बाद फसलों पर सरकार को घेरा
• कहा— 50 हजार एकड़ में अब भी पानी, किसानों को नहीं मिला मुआवजा
• विशेष गिरदावरी और राहत पैकेज की तत्काल मांग


 कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों — रोहतक, भिवानी, हिसार और फतेहाबाद — में अभी भी हजारों एकड़ भूमि जलमग्न है, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन सरकार अब तक न गिरदावरी पूरी कर पाई है, न ही मुआवजा देने की कोई ठोस कार्रवाई की है।

सैलजा ने कहा कि “किसान रोज़ नुकसान झेल रहा है और सरकार तारीख पर तारीख दे रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही, जबकि 50 हजार एकड़ से अधिक भूमि में अब भी 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें सड़ चुकी हैं, जिससे अब रबी की बुआई पर संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने बताया कि फतेहाबाद जिले के बड़ोपल, धांगड़, चिंदड़, डिंग, जंडवाला जाटान, भूना और आसपास के गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। सैलजा ने सरकार से मांग की कि तत्काल विशेष गिरदावरी कराई जाए और सभी प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।

कुमारी सैलजा ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जल निकासी के लिए पंप सेट और मशीनें मुहैया कराए, ताकि किसान आगामी रबी सीजन की बुआई कर सकें। उन्होंने कहा— “सरकार को फील्ड में जाकर खुद नुकसान का आकलन करना चाहिए, न कि किसानों को मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर कटवाने चाहिए।”

सैलजा ने रबी फसल की बुआई से पहले राहत पैकेज जारी करने की भी मांग की, ताकि किसानों को आर्थिक सहारा मिल सके और वे दोबारा खेती शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो यह किसानों के साथ दोहरी मार साबित होगी — एक तरफ फसल का नुकसान और दूसरी ओर बुआई का संकट।