झारखंड विधानसभा के बाहर छात्रों पर फिर लाठीचार्ज, JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर बवाल; अनशन कर रहे देवेंद्र महतो अस्पताल में भर्ती
झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। छात्र नेता देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
➤ विधानसभा घेराव के दौरान बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े प्रदर्शनकारी छात्र
➤ पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, कई छात्रों को चोटें
➤ 17 दिन से आंदोलन, छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय और तेज हो गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ते हुए विधानसभा गेट के पास पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी।
छात्रों का आंदोलन पिछले कई दिनों से JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चल रहा है। सोमवार को आंदोलनकारियों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र पुराने विधानसभा क्षेत्र के आसपास जुटने लगे। पुलिस ने विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी।
बैरिकेडिंग तोड़ विधानसभा गेट तक पहुंचे छात्र
प्रदर्शनकारी छात्र जब विधानसभा की ओर बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कई जगहों पर छात्रों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की और आगे बढ़ते हुए विधानसभा गेट के नजदीक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया।
रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के चोटिल होने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया गया। पूरे इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती रही और CCTV के माध्यम से स्थिति पर नजर रखी गई।
वाटर कैनन के बीच भी डटे रहे प्रदर्शनकारी
विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। पानी की बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे। कुछ छात्रों के बैरिकेडिंग पर चढ़ने की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवालों का समाधान होने तक जारी रहेगा। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई शामिल है।
17 दिन से आंदोलन, छह छात्र भूख हड़ताल पर
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र पिछले 17 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो समेत छह छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
विधानसभा घेराव के दौरान देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक वह एंबुलेंस के जरिए आंदोलन स्थल तक पहुंचे थे।
देवेंद्रनाथ महतो ने आंदोलन के दौरान सरकार पर छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। वहीं, सरकार की ओर से छात्रों के मुद्दे पर बातचीत और समाधान की बात कही गई है।
सीएम हेमंत सोरेन बोले- छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं करेंगे
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के आंदोलन को लेकर कहा कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने बातचीत और भरोसे के जरिए मामले का समाधान निकालने पर जोर दिया।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताया और कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। उन्होंने सरकार से छात्रों की बात सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।
JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी भी चर्चा में
इसी बीच भर्ती परीक्षा विवाद से जुड़े घटनाक्रम में CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई को JPSC कार्यालय में छापेमारी के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद CID उनसे पूछताछ कर रही थी।
पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी और छात्रों के विधानसभा घेराव ने पूरे मामले को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
छात्र आंदोलन के विधानसभा तक पहुंचने और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े आरोपों और छात्रों की मांगों का समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ रहे आंदोलन को बातचीत के जरिए शांत करने की कोशिश करनी होगी।
फिलहाल छात्रों ने आंदोलन खत्म करने के संकेत नहीं दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
Akhil Mahajan