कोठी, किराया और दरियादिली ! हुड्डा पर सैनी सरकार मेहरबान, 16.50 लाख पेनल रेंट माफी की तैयारी
हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा पर लगे 16.50 लाख पेनल रेंट को माफ करने की तैयारी, सैनी सरकार के फैसले पर टिकी नजरें।
■ एक साल से ज्यादा ओवरस्टे के बावजूद 16.50 लाख पेनल रेंट माफ करने की तैयारी
■ सीएम नायब सैनी कैबिनेट में ले सकते हैं बड़ा और नरम फैसला
■ सरकारी कोठी पर सियासत गरम, फैसले पर उठेंगे सवाल
हरियाणा की राजनीति में कोठी, किराया और करुणा का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर लगे करीब 16.50 लाख रुपए के पेनल रेंट को माफ करने की तैयारी ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। यह मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित उस सरकारी आवास से जुड़ा है, जिसे हुड्डा ने नई सरकार बनने के बाद भी लंबे समय तक खाली नहीं किया। अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में सरकार इस पूरे मामले में नरमी दिखाने के मूड में नजर आ रही है और संभावना है कि कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
दरअसल, अक्टूबर 2024 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार बनी थी। नियमों के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व पदाधिकारियों को 15 दिन के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है, लेकिन हुड्डा ने सेक्टर-7 की कोठी नंबर 70 को तय समय सीमा में खाली नहीं किया। दिसंबर 2024 में सरकार की ओर से नोटिस जारी कर उन्हें 15 दिन का समय दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कोठी खाली नहीं हुई और मामला लगातार लंबा खिंचता चला गया। इसी देरी के चलते पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के नियमों के तहत उन पर पेनल रेंट लगाया गया, जो समय के साथ बढ़ते हुए 16.50 लाख रुपए तक पहुंच गया।
नियमों के अनुसार, पहले महीने 50 गुना, दूसरे महीने 100 गुना, तीसरे महीने 200 गुना और इसके बाद 400 गुना तक किराया वसूला जाता है। यही वजह रही कि मामूली किराया देखते ही देखते लाखों में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय राजनीतिक तूल भी पकड़ा, जब भाजपा नेताओं ने इसे नियमों की अनदेखी बताते हुए हुड्डा पर निशाना साधा और कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
इतना ही नहीं, इस कोठी को लेकर सरकार के भीतर भी खींचतान देखने को मिली। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की नजर इसी कोठी पर थी, लेकिन हुड्डा के न हटने के कारण उन्हें दूसरी कोठी के लिए आवेदन करना पड़ा। इससे यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया।
अब तस्वीर बदल चुकी है, क्योंकि हुड्डा दोबारा नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं। ऐसे में सरकार उन्हें उसी कोठी में रहने देने और पुराने पेनल रेंट को माफ करने की तैयारी कर रही है। अगर कैबिनेट में इस फैसले को मंजूरी मिलती है, तो यह कदम राजनीतिक नरमी, रणनीति या फिर आपसी समझ का संकेत माना जाएगा।
Akhil Mahajan