स्वाद, सेवा और सुकून: हिसार में ₹10 में मिलता है रेस्टोरेंट जैसा खाना

हरियाणा के हिसार में ‘प्रशादम्’ संस्था रोज़ाना सिर्फ ₹10 में स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन परोस रही है। हर दिन लगभग 500 लोग इस मुहिम से लाभान्वित हो रहे हैं। यह पहल शहर में मानवता और सेवा की नई मिसाल बन चुकी है।

स्वाद, सेवा और सुकून: हिसार में ₹10 में मिलता है रेस्टोरेंट जैसा खाना

हिसार में ₹10 की थाली से रोज़ सैकड़ों लोगों का पेट भर रही है ‘प्रशादम्’ संस्था
स्वाद और सेवा का संगम, रेस्टोरेंट जैसा भोजन गरीबों के लिए सुलभ
हर दिन 500 से ज़्यादा लोगों को भोजन, मानवता की नई मिसाल हिसार से


हिसार। जहां महंगाई ने आम आदमी की रसोई तक का बजट बिगाड़ रखा है, वहीं हरियाणा के हिसार में एक अनोखी मुहिम लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रही है। शहर की ‘प्रशादम्’ संस्था रोज़ाना ₹10 में भरपेट स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन परोस रही है। रेस्टोरेंट जैसा खाना, गरम रोटियां, दाल, चावल, सब्जी और मिठाई — सब कुछ एक प्लेट में सिर्फ दस रुपये में। यह केवल एक भोजन नहीं, बल्कि मानवता की थाली बन चुकी है।

‘प्रशादम्’ संस्था का यह अभियान अब हिसार की पहचान बन गया है। हर दिन सुबह से लेकर दोपहर तक सैकड़ों लोग संस्था के केंद्र पर पहुंचते हैं — कोई रिक्शा चालक, कोई मज़दूर, तो कोई बुजुर्ग या विद्यार्थी। यहाँ न कोई भूखा लौटता है और न किसी को शर्मिंदगी महसूस होती है। सबको समान रूप से सम्मान और स्नेह के साथ भोजन कराया जाता है।

संस्था के प्रमुख अमित गोयल बताते हैं कि “हमारा मकसद सिर्फ खाना खिलाना नहीं, बल्कि लोगों के मन में यह भाव जगाना है कि सेवा और सम्मान साथ-साथ चल सकते हैं। जो लोग खाने के लिए मजबूर हैं, उन्हें भी स्वाद और सम्मान का हक है।”

‘प्रशादम्’ में मिलने वाला खाना किसी रेस्टोरेंट से कम नहीं। मेन्यू रोज़ बदलता है — कभी छोले-चावल, कभी कढ़ी-पकौड़ा, कभी दाल-रोटी-सब्जी और कभी खीर या हलवा। भोजन की पूरी तैयारी स्वच्छ रसोई में की जाती है और हर थाली में बराबर मात्रा में भोजन परोसा जाता है।

इस पहल के पीछे कई स्थानीय दानदाताओं और समाजसेवियों का हाथ है। कई लोग हर महीने संस्था को अनाज, सब्जियां या आर्थिक सहयोग देते हैं। संस्था के स्वयंसेवक रोज़ाना सुबह 8 बजे से तैयारी शुरू करते हैं और दोपहर तक लगभग 500 लोगों को भोजन कराया जाता है

‘प्रशादम्’ की टीम का कहना है कि उनका लक्ष्य आने वाले महीनों में हिसार के हर कोने तक यह थाली पहुँचाना है। संस्था चाहती है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से क्यों न हो।

यह सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है — मानवता, स्नेह और सम्मान का आंदोलन, जो बताता है कि समाज में बदलाव बड़े कदमों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी कोशिशों से आता है।