आयुष्मान योजना में घोटाला! नवजात को कागजों में भर्ती दिखाकर ₹48 हजार का फर्जी क्लेम, उकलाना के अस्पताल पर रेड

हिसार के उकलाना में आयुष्मान योजना के तहत नवजात को कागजों में भर्ती दिखाकर ₹48 हजार का फर्जी क्लेम करने का मामला सामने आया, CM फ्लाइंग की रेड में खुलासा।

आयुष्मान योजना में घोटाला! नवजात को कागजों में भर्ती दिखाकर ₹48 हजार का फर्जी क्लेम, उकलाना के अस्पताल पर रेड

नवजात को कागजों में भर्ती दिखाकर 48 हजार का क्लेम
सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त रेड में खुलासा
जांच में अस्पताल की कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं


हिसार जिले के उकलाना से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी अस्पताल ने नवजात बच्चे को कागजों में भर्ती दिखाकर ₹48 हजार का फर्जी क्लेम निकाल लिया। शिकायत मिलने के बाद सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने रविवार को उकलाना मंडी स्थित विधाता नर्सिंग होम पर छापा मारा, जहां जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।

कार्रवाई सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना के नेतृत्व में की गई। टीम में स्वास्थ्य विभाग के डॉ. विश्वजीत चौहान, सहायक राम भगत, लिपिक प्रदीप कुमार, एएसआई सुरेंद्र सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम ने अस्पताल में रिकॉर्ड, स्टाफ और व्यवस्थाओं की गहन जांच की, जिसमें शिकायत सही पाई गई।

मामले का खुलासा गांव बिठमड़ा निवासी संदीप कुमार की शिकायत से हुआ। संदीप ने बताया कि 3 मार्च को वह अपनी पत्नी सोनिया को डिलीवरी के लिए उक्त अस्पताल में लेकर गया था। यहां सामान्य प्रसव हुआ और 7 मार्च को मां और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई। अस्पताल को इलाज और डिलीवरी के ₹25 हजार भी दिए गए।

संदीप के अनुसार, उसने इलाज को आयुष्मान कार्ड के तहत करने का अनुरोध किया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मना कर दिया और उनकी पत्नी का आधार कार्ड व आयुष्मान कार्ड अपने पास रख लिया। इसके बाद 14 मार्च को चेकअप के लिए अस्पताल जाने पर डॉक्टर ने बच्चे को भी साथ लाने को कहा, जबकि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था।

संदीप ने बताया कि 15 मार्च को वह अकेला ही अस्पताल पहुंचा, जहां उसे स्टाफ से पता चला कि उसके नवजात बच्चे को 7 मार्च से ही अस्पताल में भर्ती दिखाया गया है। यह सुनकर उसे शक हुआ और उसने तुरंत अपने दस्तावेज वापस ले लिए। बाद में सीएससी सेंटर पर जांच कराने पर खुलासा हुआ कि अस्पताल ने फर्जी तरीके से बच्चे को एडमिट दिखाकर ₹48 हजार का क्लेम कर लिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल में बच्चों की नर्सरी में कोई प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था। सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। आयुष्मान योजना से संबंधित कोई रिकॉर्ड या रजिस्टर मेंटेन नहीं किया जा रहा था। बिना डिग्री वाले युवक-युवतियों से चिकित्सा कार्य करवाया जा रहा था और स्टाफ का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला। यहां तक कि बिल बुक और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अधूरे पाए गए।

सीएम फ्लाइंग इंचार्ज सुनैना ने बताया कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त व बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना है, लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़े से न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पात्र लोगों के अधिकारों का भी हनन होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में संबंधित अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को शिकायत भेज दी गई है और आगे भी ऐसी अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस दौरान पीड़ित महिला सोनिया और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे और अपने बयान दर्ज कराए। पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।