झाड़ फूंक के नाम पे महिला के स्तन दबाने वाला बाबा घिरा विवादों में, जानें पूरी खबर

हरियाणा के सिरसा जिले में बाबा संजय भगत पर अंधविश्वास फैलाकर सरसों का तेल व हजारों रुपए वसूलने व महिला के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप। ग्रामीणों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जांच जारी। विवाद बढ़ता जा रहा है।

झाड़ फूंक के नाम पे महिला के स्तन दबाने वाला बाबा घिरा विवादों में, जानें पूरी खबर

➤ बाबा संजय भगत पर अंधविश्वास फैलाकर सरसों का तेल व हजारों रुपए वसूलने का आरोप
➤ महिला को छेड़ने का वायरल वीडियो, राजस्थान व सिरसा से शिकायतें, पुलिस जांच में जुटी
➤ बाबा समर्थकों व विरोधियों में बंटा गांव, दरबार पर विवादित आरोपों की जांच जारी

हरियाणा के सिरसा जिले के हांडीखेड़ा गांव में बाबा संजय भगत के द्वारा अंधविश्वास फैलाने, झाड़-फूंक करके लोगों से सरसों का तेल और हजारों रुपए वसूलने के मामले में गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने बाबा संजय के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि बाबा झाड़-फूंक के नाम पर सरसों का तेल और हजारों रुपए लेकर लोगों को धोखा दे रहा है। इससे पहले राजस्थान के मेहंदीपुर का एक व्यक्ति भी बाबा के खिलाफ शिकायत कर चुका है, जिसमें बताया गया कि पैसे लेने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। पुलिस ने बाबा को थाने लेकर भी गई थी, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया क्योंकि शिकायत वापस ले ली गई थी।

बाबा संजय अपने दरबार में लोगों की बीमारियां ठीक करने और नशा छुड़ाने का दावा करता है। विरोध शुरू होने के बाद उसने अपने साथ बाउंसर और 4 सेवादार भी रख लिए हैं। बाबा बनने से पहले संजय हेयर ड्रेसर, कबाड़ी और किराना व्यापारी के रूप में काम कर चुका है। उसकी शादी 9 साल पहले हुई थी, लेकिन कोई संतान नहीं है, हाल ही में उसने अपने भाई की बेटी को गोद लिया है। ग्रामीणों के मुताबिक, संजय ने दो साल पहले गुरु का नाम लेकर झाड़-फूंक का काम शुरू किया और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बनाकर लोगों की भीड़ बढ़ाई। मोर पंख से झाड़ा शुरू किया, फिर लाल कपड़े से ढके मोर पंख का उपयोग करने लगा। नशेड़ी लोग विशेष रूप से उसकी सेवा लेने लगे। पहले घर पर झाड़-फूंक करता था, फिर इसे बढ़ाकर हांडीखेड़ा दरबार स्थापित किया।

दरबार में बालाजी व शनि देव की फोटो लगाकर पूजा-अर्चना की जाती है। संजय अब हफ्ते में मंगलवार, शनिवार और रविवार को दरबार लगाता है। बाबा का दावा है कि नशा छुड़ाने, बीमारी दूर करने, शादी करवाने और घर संबंधी दोष दूर करने में मदद करता है। लेकिन ग्रामीण आरोप लगाते हैं कि यह सब अंधविश्वास फैलाकर लोगों को ठगने का जरिया बन चुका है। शुरुआत में सवा लीटर सरसों का तेल व सवा किलो अनाज चढ़ावा लिया जाता था, लेकिन अब यह रकम बढ़कर 11, 21 व 31 हजार रुपए तक पहुँच गई। चढ़ावे में लिया गया तेल व अनाज इकट्ठा करके बाद में बेचा जाता है। कुछ समय से बाबा सिविल अस्पताल के सामने लंगर भी बांटता है, जिससे उसकी लोकप्रियता और विवाद दोनों बढ़े।

बाबा संजय ने हांडीखेड़ा दरबार के नाम से यूट्यूब व इंस्टाग्राम चैनल बनाए हैं, जिसमें झाड़-फूंक करते हुए और मन्नत पूरी होने पर मिठाई भेंट चढ़ाते हुए वीडियो अपलोड किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसरों से प्रचार भी कराया गया। बाबा संजय के साथ दो बाउंसर भी रहते हैं, एक महिला बाउंसर भी शामिल है। सेवादार खेतों में बनाए गए दरबार की सफाई व भंडारे के काम में लगे हैं।

विवाद तब और बढ़ा, जब एक व्यक्ति की दरबार में झाड़-फूंक के दौरान मौत हो गई। इस मामले में परिवार ने बाबा पर आरोप लगाए कि नशा छुड़वाने के लिए झाड़ा लगवाने आए थे। इसके अलावा एक महिला का झाड़ा लगाते समय निजी अंग छूने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई। हाल ही में मेहंदीपुर का एक व्यक्ति मदनलाल दरबार में अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने आया था। बाबा संजय ने उसे सात फेरी लगाने के लिए मजबूर किया और 30-40 हजार रुपए वसूल लिए। जब पैसे वापस मांगने पर बाउंसर ने कॉलर पकड़कर धमकी दी, तो मदनलाल ने पुलिस को बुलाया। हालांकि बाबा ने पैसे वापस करवा दिए, जिसके कारण मदनलाल ने शिकायत वापस ले ली। इसके बावजूद ग्रामीणों ने फिर से शिकायत दर्ज करवाई, जिससे बाबा की परेशानी बढ़ गई।

बाबा संजय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा ग्रामीणों पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका कोई दुर्भावना नहीं है, बल्कि काफी लोगों को फायदा पहुंचा चुका है। संजय ने बताया कि शुगर की बीमारी ठीक की है और नशा छुड़वाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि दरबार चलाने के लिए कोई पैसा नहीं लिया और जमीन भी सेवादार से प्राप्त की गई है।

हालांकि गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीण दो धड़ों में बंटे हैं। एक हिस्सा बाबा संजय के समर्थन में खड़ा है, जबकि दूसरा उसका विरोध करता है। विरोधी बताते हैं कि बाबा के झाड़-फूंक करवाने वाले वाहन अक्सर गलियों व घरों के सामने अव्यवस्थित खड़े रहते हैं, जिससे गांववासियों को परेशानी होती है। बाबा समर्थक ग्रामीण उसे गांव में शरण देने के पक्षधर हैं, लेकिन पंचायत के फैसले के बाद बाबा ने दरबार गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थापित किया है। विवाद की गूंज अब धीरे-धीरे थाने तक पहुंच चुकी है, और जांच प्रक्रिया जारी है।