करनाल के युवक की अर्मेनिया में मौत, कर्ज लेकर चार साल पहले भेजा था विदेश; शव देख मां-बहन बेसुध
करनाल के 21 वर्षीय राजीव की अर्मेनिया में मौत हो गई। कर्ज लेकर परिवार ने उसे विदेश भेजा था। 11वें दिन शव गांव पहुंचा तो मां-बहन बेसुध हुईं।
➤ अर्मेनिया में करनाल के 21 वर्षीय राजीव की मौत
➤ कर्ज लेकर चार साल पहले विदेश भेजा था, कंस्ट्रक्शन साइट पर करता था काम
➤ 11वें दिन गांव पहुंचा शव, मां और बहन अंतिम दर्शन करते ही बेसुध हुईं
हरियाणा के करनाल के 21 वर्षीय राजीव की अर्मेनिया में मौत हो गई। परिवार के लिए बेटे को विदेश भेजना बेहतर भविष्य की उम्मीद थी। करीब चार साल पहले परिवार ने 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज लेकर राजीव को काम की तलाश में अर्मेनिया भेजा था। वहां वह कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था और अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद कर रहा था। परिवार ने भी उसकी मेहनत के भरोसे मकान बनवाने का काम शुरू किया था।
राजीव की मौत की सूचना उसके साथ रहने वाले रूममेट ने परिवार को फोन कर दी थी। रूममेट के मुताबिक, काम खत्म करने के बाद जब वह कमरे पर पहुंचा तो राजीव बेड पर लेटा हुआ था। कुछ समय बाद जब उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तो उसने राजीव को हिलाकर देखा। तब पता चला कि उसकी सांसें नहीं चल रही थीं। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राजीव को मृत घोषित कर दिया।
सोमवार को जब राजीव का शव गांव पहुंचा, तो घर में मातम छा गया। बेटे का शव देखते ही उसकी मां कमलेश और बहन बेसुध हो गईं। परिवार के लोगों ने किसी तरह दोनों को संभाला। अंतिम दर्शन के बाद राजीव का दाह संस्कार कर दिया गया।
कर्ज लेकर बेटे को विदेश भेजा था, परिवार को थी आर्थिक हालात सुधरने की उम्मीद
राजीव के परिवार में उसकी मां कमलेश, भाई-बहन हैं। उसके पिता की मौत हो चुकी है। राजीव परिवार का छोटा बेटा था, जबकि उसका बड़ा भाई अभिषेक है। परिवार दिहाड़ी मजदूरी करता है।
परिवार के मुताबिक, वर्ष 2022 में करीब 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज उठाकर राजीव को अर्मेनिया भेजा गया था। परिवार को उम्मीद थी कि राजीव विदेश में मेहनत करके न सिर्फ अपना भविष्य बनाएगा, बल्कि घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी मदद करेगा।
राजीव ने अर्मेनिया पहुंचने के बाद कंस्ट्रक्शन साइट पर काम शुरू किया। बड़े भाई अभिषेक के मुताबिक, राजीव अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक मदद भी करने लगा था। बेटे की मेहनत और विदेश से होने वाली कमाई के भरोसे परिवार ने कुछ समय पहले मकान बनवाने का काम शुरू किया था।
भाई रोज भेजता था मकान के काम की फोटो, अब उम्मीदें हुईं धराशायी
अभिषेक के मुताबिक, वह रोजाना मकान के निर्माण से जुड़ी फोटो राजीव को भेजता था। परिवार के लिए यह मकान केवल घर नहीं था, बल्कि राजीव के बेहतर भविष्य और उसकी मेहनत से जुड़ी उम्मीदों का हिस्सा था।
राजीव भी परिवार से बातचीत करता था और वहां काम करते हुए घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान दे रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में मेहनत करने के बाद वह घर की परिस्थितियों को बेहतर बनाने में मदद करेगा। लेकिन उसकी अचानक मौत से परिवार की ये उम्मीदें धराशायी हो गईं।
कमरे में बेड पर बेसुध मिला था राजीव, रूममेट ने दी थी सूचना
बड़े भाई अभिषेक ने बताया कि 18 दिन पहले राजीव के एक रूममेट की कॉल आई थी। रूममेट ने बताया कि वह काम खत्म करने के बाद कमरे पर पहुंचा तो राजीव बेड पर लेटा हुआ था।
कुछ समय तक राजीव के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तो रूममेट ने उसे हिलाकर देखा। इसके बाद पता चला कि राजीव की सांसें नहीं चल रही थीं। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने राजीव को मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार, राजीव की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। परिवार का कहना है कि वह बिल्कुल खुश था और घटना वाले दिन भी परिवार से उसकी बातचीत हुई थी।
बेटे का शव देखते ही मां और बहन हुईं बेसुध
सोमवार को राजीव का शव जब गांव पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां कमलेश और छोटी बहन ने जैसे ही राजीव का शव देखा, दोनों बेसुध हो गईं। परिवार के लोग उन्हें संभालते हुए घर के अंदर ले गए।
बड़े भाई अभिषेक समेत परिवार के अन्य सदस्य भी राजीव के शव को देखकर रोते-बिलखते रहे। विदेश में बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे को परिवार ने कर्ज लेकर बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश भेजा था, वही बेटा अब ताबूत में घर लौटा।
मां बोलीं- अब किसी चीज की जरूरत नहीं, सिर्फ बेटे का चेहरा देखना था
राजीव की मां कमलेश ने बताया कि उन्होंने बेटे को कर्ज लेकर विदेश भेजा था। उनका उद्देश्य था कि राजीव वहां काम करके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर कर सके।
कमलेश के मुताबिक, राजीव उन्हें रोज फोन करता था। एक दिन जब उन्होंने उसे फोन किया तो बार-बार कोशिश करने के बावजूद उससे बात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्हें राजीव की मौत की खबर मिली। बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
मां ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में ऐसा दिन देखने की कभी कल्पना नहीं की थी। अब उन्हें किसी चीज की जरूरत नहीं है। वह सिर्फ आखिरी बार अपने बेटे राजीव का चेहरा देखना चाहती थीं।
मुख्यमंत्री से मिले थे परिजन, 11वें दिन भारत पहुंचा शव
राजीव की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार और समाज के लोग मुख्यमंत्री हरियाणा से मिले थे। परिजन सुभाष ने बताया कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि 11 दिनों में शव भारत पहुंच जाएगा।
सुभाष के मुताबिक, आज 11वां दिन है और राजीव का शव उनके पास पहुंच चुका है। अंतिम दर्शन के बाद राजीव का दाह संस्कार कर दिया गया। परिवार ने शव भारत पहुंचाने में सरकार की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार जताया।
Akhil Mahajan