हरियाणा में IAS अफसरों की कोठियों पर रेड,संपत्ति की जांच में जुटी CBI

हरियाणा के 4 IAS अधिकारियों और एक निजी कंपनी के ठिकानों पर CBI ने छापेमारी की। सरकारी फंड में कथित गड़बड़ियों और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है।

हरियाणा में IAS अफसरों की कोठियों पर रेड,संपत्ति  की जांच में जुटी CBI

हरियाणा के 4 IAS अधिकारियों के ठिकानों पर CBI की बड़ी छापेमारी

चंडीगढ़, पंचकूला, करनाल और नोएडा समेत 6 स्थानों पर एक साथ रेड

सरकारी फंड में कथित गड़बड़ी, संपत्ति और बैंक खातों की जांच तेज


हरियाणा में आईएएस अधिकारियों से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने देर रात चंडीगढ़, पंचकूला, करनाल और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित छह स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह जांच हरियाणा सरकार के आठ विभागों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के दो विभागों के सरकारी फंड में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी बताई जा रही है।

सीबीआई ने जिन अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी ली, उनमें हरियाणा कैडर के IAS मोहम्मद शाइन, विनीत गर्ग, आरके सिंह और प्रदीप डागर के आवास शामिल हैं। इसके अलावा नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।

जांच के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात अपने कब्जे में लिए हैं। देर रात तक अधिकारियों की टीम विभिन्न स्थानों पर जांच में जुटी रही।

सीबीआई की प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खातों के संचालन, धनराशि के ट्रांसफर और बाद में रकम को अन्य खातों में भेजने की प्रक्रिया में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि इस प्रक्रिया के बदले संबंधित लोगों को कोई अनुचित लाभ तो नहीं मिला।

जांच के दायरे में पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित एक आलीशान कोठी भी आई है। सीबीआई को जानकारी मिली है कि एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े रिश्तेदार के नाम पर करीब एक कनाल की कोठी खरीदी गई थी। बताया जा रहा है कि इस संपत्ति के लिए धन का लेन-देन करीब दो महीने पहले हुआ था। एजेंसी को इस खरीद-फरोख्त से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं।

सीबीआई अब संबंधित अधिकारियों के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित लेन-देन का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित अपराध से अर्जित धन पहले विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में जमा कराया गया और बाद में कंपनी निदेशक के निजी खाते में स्थानांतरित किया गया। इस संबंध में कई वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

सीबीआई ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। चार्जशीट में हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के कुछ लोक सेवकों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि IDFC First Bank और AU Finance Bank में जमा सरकारी धन को कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेन-देन के जरिए अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और जिन अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी जल्द ही अदालत में पूरक चार्जशीट भी दाखिल कर सकती है।

इससे पहले भी सीबीआई दो आईएएस अधिकारियों से लंबी पूछताछ कर चुकी है। उनके मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे। अब एजेंसी सरकारी धन के ट्रांसफर की मंजूरी देने वाले अधिकारियों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।