बिजली महंगी नहीं चाहिए, बोले हरियाणा के उपभोक्ता

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बिजली महंगी नहीं चाहिए, बोले हरियाणा के उपभोक्ता

• हरियाणा में बिजली दरें बढ़ाने के खिलाफ उपभोक्ताओं की खुली राय
• HERC ने पूरे प्रदेश से राय लेने का फैसला किया
• 10 फरवरी से विभिन्न जिलों में जनसुनवाई शुरू


हरियाणा में बिजली की दरें बढ़ाने के प्रस्तावों को लेकर जनता का रुख साफ नजर आया। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की ओर से आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने हिस्सा लेकर स्पष्ट किया कि वे बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं चाहते। यह जनसुनवाई पंचकूला स्थित HERC कोर्ट रूम में आयोजित की गई।

जनसुनवाई उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) द्वारा दायर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) याचिकाओं पर हुई। सुनवाई की अध्यक्षता HERC चेयरमैन नंदलाल शर्मा ने की। आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग और शिव कुमार भी मौजूद रहे।

इस दौरान सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं ने अपनी राय रखी। अधिकतर वक्ताओं ने कहा कि महंगाई के इस दौर में बिजली दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।

HERC चेयरमैन नंदलाल शर्मा ने कहा कि आयोग किसी भी फैसले से पहले पूरे हरियाणा की राय लेना चाहता है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई का क्रम आगे भी जारी रहेगा और 10 फरवरी को गुरुग्राम से इसकी शुरुआत की जाएगी।

जनसुनवाई में यूएचबीवीएन के एमडी मनी राम शर्मा और डीएचबीवीएन के एमडी विक्रम सिंह सहित निगमों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

डिस्कॉम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यूएचबीवीएन क्षेत्र के 3393 गांवों और डीएचबीवीएन क्षेत्र के 2517 गांवों में फिलहाल 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। इस पर HERC अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि जो गांव अभी शेष हैं, वहां भी शीघ्र 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाए।

वित्तीय पक्ष पर चर्चा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2026-27 के लिए दोनों निगमों ने 51,156.71 करोड़ रुपये के राजस्व की मांग की है। चालू वर्ष में 1,605.16 करोड़ रुपये का सरप्लस बताया गया, लेकिन पिछले वर्षों के घाटे को जोड़ने पर 4,484.71 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा सामने आता है।

आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (ATC) लॉस को किसी भी स्थिति में बढ़ने नहीं दिया जाएगा। साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन लॉस कम करने, सस्ती दरों पर ऋण लेने और एवरेज कॉस्ट ऑफ सप्लाई व एवरेज रेवेन्यू रियलाइजेशन के अंतर को घटाने पर जोर दिया गया।

यूएचबीवीएन ने बताया कि उसका डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 9.33 प्रतिशत, जबकि डीएचबीवीएन का 10.26 प्रतिशत है। आयोग ने सोलर और ग्रीन एनर्जी को और बढ़ावा देने की जरूरत बताई। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल हरियाणा की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से है।

बीबीएमबी से प्रदेश को 846.14 मेगावाट बिजली मिल रही है, जिसकी दर करीब 84 पैसे प्रति यूनिट है। 30 नवंबर 2025 तक हरियाणा की कुल स्थापित बिजली क्षमता 17,003.91 मेगावाट और कुल उपभोक्ताओं की संख्या 83 लाख से अधिक है।

जनसुनवाई के दौरान आए सभी सुझावों को आयोग ने दर्ज कर लिया है। HERC ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय जनहित और उपभोक्ताओं की राय को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।