हरियाणा : अफसरों की डांट से मीटिंग में रो पड़ीं महिला डॉक्टर, CM से की शिकायत; DG बोले- “लाखों सैलरी, नतीजे जीरो”

हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग की बैठक के दौरान अफसरों की डांट से लेडी डॉक्टर के रोने पर विवाद गहराया। HCMSA ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेज अफसरों पर अपमानजनक भाषा का आरोप लगाया। DG हेल्थ ने कहा- लाखों की सैलरी, लेकिन प्रदर्शन शून्य।

हरियाणा : अफसरों की डांट से मीटिंग में रो पड़ीं महिला डॉक्टर, CM से की शिकायत; DG बोले- “लाखों सैलरी, नतीजे जीरो”

    • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग में महिला डॉक्टर आंसुओं से भर आईं, कहा गया – “काम नहीं आता तो हटा देना चाहिए”
    • HCMSA ने CM को शिकायत भेजी, आरोप – अपमानजनक भाषा और चार्जशीट की धमकी से डॉक्टरों का मनोबल टूट रहा
    • DG हेल्थ का पलटवार – लाखों की सैलरी लेने वाले कुछ डॉक्टर इलाज तक नहीं जानते, कार्रवाई हो सकती है

हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान एक लेडी डॉक्टर की आंखों में आंसू आ गए। हुआ यूं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग में सभी जिलों के CMO, PMO, डिप्टी CMO और SMO शामिल थे। बैठक स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति पर थी, लेकिन अफसरों की सख्त टिप्पणियों ने माहौल तनावपूर्ण बना दिया। बताया जाता है कि एक वरिष्ठ महिला डॉक्टर, जिनकी रिटायरमेंट नजदीक है, कठोर शब्दों और बार-बार चार्जशीट की धमकी से भावुक होकर रो पड़ीं। अफसरों ने यहां तक कह दिया – “आपको काम नहीं आता, आपको हटा देना चाहिए।”

अब यह पूरा  एक बड़े विवाद में बदल चुका है। सरकारी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने इसे लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी को लिखित शिकायत भेज दी है। एसोसिएशन का आरोप है कि विभागीय बैठकों में वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टरों से अपमानजनक भाषा में बात करते हैं, बार-बार चार्जशीट की धमकी देते हैं और इससे डॉक्टरों का मनोबल टूट रहा है।

यह मामला 3 सितंबर को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक से जुड़ा है, जिसमें NHM के एमडी, DG हेल्थ, MCH डायरेक्टर और सभी जिलों के CMO, PMO, डिप्टी CMO व SMO मौजूद थे। बैठक स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के लिए थी, लेकिन आरोप है कि अफसरों के कठोर शब्दों और बार-बार की धमकियों से डॉक्टर असहज हो गए। इसी दौरान एक वरिष्ठ महिला डॉक्टर भावुक हो गईं और रो पड़ीं।

कई जिलों से आई शिकायतों के बाद 4 सितंबर को एसोसिएशन ने औपचारिक रूप से CM को लेटर लिखा। झज्जर जिला प्रधान डॉ. आकृति हुड्डा ने कहा कि यह सामूहिक शिकायत है। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी लगातार अनुचित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे डॉक्टरों में निराशा और मानसिक तनाव है। पीएनडीटी बैठक में भी 900 से कम लिंगानुपात वाले जिलों के CMO और SMO को सरेआम चार्जशीट की धमकी दी गई।

शिकायत में चार अहम बिंदु उठाए गए हैं—अपमानजनक भाषा, सीनियर डॉक्टरों से खराब व्यवहार, मनोबल टूटना, और CM से हस्तक्षेप की मांग। एसोसिएशन ने कहा है कि समीक्षा बैठकें सकारात्मक संवाद का मंच बननी चाहिए, तभी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

वहीं, अधिकारियों ने इस शिकायत को नकारा है। MCH डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र यादव ने कहा कि सभी वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहते हैं, ऐसे में किसी के अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का सवाल ही नहीं। हमारा मकसद सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना है।

DG हेल्थ डॉ. कुलदीप ने और तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये वेतन लेने वाले कई अधिकारी काम में फेल साबित हो रहे हैं। एक डिप्टी CMO को तीन लाख से ज्यादा सैलरी दी जाती है, लेकिन समीक्षा में उसका प्रदर्शन शून्य रहा। कुछ डॉक्टरों को तो टीबी और मलेरिया जैसे सामान्य रोगों का इलाज भी नहीं पता। ऐसे में उन्हें डॉक्टर कहलाने का हक नहीं।

इस विवाद ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टर-अफसर संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।