हरियाणा में दिल्ली कूच रोकने के लिए हाई अलर्ट: बॉर्डर सील, कई नेता हिरासत में; करनाल में पैदल बढ़े किसान, 10 जिलों में प्रदर्शन
दिल्ली कूच से पहले हरियाणा में बॉर्डर सील कर सुरक्षा बढ़ा दी गई। कई किसान नेता और CJP समर्थक हिरासत में लिए गए, जबकि करनाल में किसान पैदल दिल्ली की ओर बढ़ते नजर आए।
➤ दिल्ली जाने वाले सभी प्रमुख बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ी, शंभू बॉर्डर फिर बंद
➤ कई किसान नेता और CJP समर्थक हाउस अरेस्ट व डिटेन, 10 जिलों में प्रदर्शन
➤ करनाल-कुरुक्षेत्र में किसानों को रोका, वाहन रुके तो पैदल ही दिल्ली की ओर बढ़े
गुरुग्राम/चंडीगढ़। दिल्ली कूच को रोकने के लिए मंगलवार को हरियाणा में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों और किसान संगठनों के प्रस्तावित कार्यक्रमों को देखते हुए राज्य के दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश से जुड़े बॉर्डरों पर सख्त निगरानी कर दी गई। कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए, जबकि कई जिलों में किसान नेताओं और CJP समर्थकों को हाउस अरेस्ट या हिरासत में लिया गया। पूरे घटनाक्रम के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन, धरपकड़ और पुलिस के साथ नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आईं।
CJP जहां संसद घेराव की तैयारी में जुटी है, वहीं किसान संगठनों ने अमेरिका-भारत फ्री ट्रेड डील (FTA) के विरोध में देशव्यापी महापंचायत का आह्वान किया है। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन सुबह से ही अलर्ट मोड पर नजर आया। शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। पुल पर सीमेंट के बैरिकेड लगाकर रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया तथा यातायात को दूसरे मार्गों से डायवर्ट किया गया। पुलिस की निगरानी के कारण बॉर्डर क्षेत्र पूरी तरह छावनी में तब्दील नजर आया।
करनाल और कुरुक्षेत्र में दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने कई जगह रोक दिया। करनाल के बसताड़ा टोल पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती के बीच किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। जब वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली तो कई किसान पैदल ही दिल्ली की ओर निकल पड़े। पुलिस लगातार उन्हें समझाने और आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करती रही, जिससे कुछ समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
कुरुक्षेत्र में ज्योतिसर चौकी के पास पुलिस ने दिल्ली जा रही एक निजी बस को रोक लिया। बस में करीब 30 किसान सवार थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में भारतीय किसान यूनियन पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच भी शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा शाहाबाद, पिपली, पिहोवा, लाडवा और ज्योतिसर सहित कई स्थानों पर पुलिस ने विशेष नाके लगाए और आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच की।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने भी बहादुरगढ़-द्वारका बाईपास पर बैरिकेडिंग कर दी है। यहां निजी वाहनों को कड़ी जांच के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा है। हरियाणा और दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी बड़े जमावड़े को राजधानी की ओर बढ़ने से रोका जा सके।
इसी बीच महेंद्रगढ़ जिले के कनीना मंडी राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं ने सोनम वांगचुक के समर्थन और भाजपा के विरोध में नारेबाजी की। मामले की जानकारी मिलने के बाद सरकार ने विद्यालय के प्रिंसिपल नरेश कुमार को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शंभू बॉर्डर एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। किसान आंदोलन के दौरान NH-44 (जीटी रोड) पर स्थित यह बॉर्डर करीब 13 महीने (401 दिन) तक बंद रहा था। इसे 13 फरवरी 2024 को सील किया गया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद 20 मार्च 2025 को इसे दोबारा खोला गया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन ने एक बार फिर इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह मार्ग दिल्ली, अंबाला और अमृतसर के बीच सबसे महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में माना जाता है।
प्रदेशभर में जारी धरपकड़, बॉर्डरों पर बढ़ाई गई सुरक्षा, किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास और अलग-अलग जिलों में चल रहे प्रदर्शनों के कारण पूरे दिन हालात तनावपूर्ण बने रहे। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि किसान संगठन अपने तय कार्यक्रम पर कायम रहने की बात कह रहे हैं।
Akhil Mahajan