स्पेन में पकड़ा गया भारत का मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों, भारत लाने की तैयारी
भारत के मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को स्पेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। पंजाब एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की सूचना पर हुई कार्रवाई के बाद अब उसे भारत लाने की तैयारी चल रही है।
➤ स्पेन में पंजाब एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
➤ चंडीगढ़ कैशियर हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप, NIA ने रखा था 10 लाख का इनाम
➤ भारत लाने की तैयारी तेज, पूछताछ में कई बड़े खुलासों की उम्मीद
भारत के मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को स्पेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई पंजाब एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) से मिली खुफिया सूचना के आधार पर स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने की। गोल्डी ढिल्लों की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों पर चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह विदेश में बैठकर आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहा था।
भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद अब गोल्डी ढिल्लों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। भारतीय एजेंसियां स्पेन के साथ कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी हैं। भारत लाए जाने के बाद उससे कई मामलों में पूछताछ की जा सकती है।
NIA ने रखा था 10 लाख का इनाम
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) लंबे समय से गोल्डी ढिल्लों की तलाश कर रही थी। एजेंसी ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि गिरफ्तारी के बाद उसके नेटवर्क और सहयोगियों से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है।
2022 में भारत छोड़कर भाग गया था
जानकारी के मुताबिक, गोल्डी ढिल्लों वर्ष 2022 में भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। इसके बाद वह कथित तौर पर विदेश से ही अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियों को संचालित करता रहा। इसी वर्ष 13 जून 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में हुए जानकी दास हत्याकांड की जिम्मेदारी भी उसने ली थी।
जांच एजेंसियों की नजर आगे की कार्रवाई पर
गोल्डी ढिल्लों की गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय जांच एजेंसियों की नजर उसके प्रत्यर्पण और पूछताछ पर है। अधिकारियों का मानना है कि इससे कई पुराने मामलों और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क की जांच को नई दिशा मिल सकती है।
Akhil Mahajan