सोना-चांदी सस्ता, रिकॉर्ड हाई से भारी गिरावट, निवेशक हैरान
सोना 3,470 रुपए टूटकर 1.51 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 15,748 रुपए गिरकर 2.41 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। निवेशकों का रुख कैश की ओर बढ़ रहा है।
- सोना ₹3,470 टूटकर ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा
- चांदी 8 दिन में ₹22 हजार लुढ़की, अब ₹2.41 लाख किलो
- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच निवेशकों का कैश की ओर रुख
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने का भाव 3,470 रुपए टूटकर 1.51 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।
वहीं चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एक किलो चांदी का दाम 15,748 रुपए घटकर 2.41 लाख रुपए प्रति किलो रह गया। इससे पहले 31 मई को चांदी की कीमत 2,63,350 रुपए प्रति किलो दर्ज की गई थी। यानी महज 8 दिनों में चांदी करीब 22 हजार रुपए सस्ती हो चुकी है।
इस वर्ष सोना और चांदी दोनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था। इसके बाद लगातार तेजी आई और 29 जनवरी 2026 को सोना 1.76 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। हालांकि अब उस रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 25 हजार रुपए तक टूट चुका है।
चांदी की बात करें तो 31 दिसंबर 2025 को इसका भाव 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। इसके बाद तेज उछाल के साथ 29 जनवरी को चांदी 3.86 लाख रुपए प्रति किलो के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन तब से अब तक करीब 130 दिनों में चांदी की कीमत 1.45 लाख रुपए प्रति किलो तक नीचे आ चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय निवेशक सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है।
जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम कम करना चाहते हैं। ऐसे में वे अपने निवेश का कुछ हिस्सा बेचकर कैश रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। अनिश्चित माहौल में नकदी को अधिक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
इसके अलावा जनवरी में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। ऐसे में बड़े निवेशकों और फंड्स ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। बाजार में सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना और दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आने लगे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात, डॉलर इंडेक्स और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने-चांदी की दिशा तय करेंगी। फिलहाल निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी हुई है।
Akhil Mahajan