दिल्ली ब्लास्ट केस में हरियाणा से तीसरी संदिग्ध कार बरामद, लेडी आतंकी शाहीन का नाम जुड़ा, लाल कार से ढ़ोया गया था विस्‍फोटक, फर्जी मान्यता दिखाने पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी को नोटिस

फरीदाबाद के खंदावली गांव में खड़ी इकोस्पोर्ट कार से विस्फोटक ढोने के सबूत मिले। NIA-NSG जांच में आतंकी मॉड्यूल और यूनिवर्सिटी कनेक्शन का खुलासा हुआ।

दिल्ली ब्लास्ट केस में हरियाणा से तीसरी संदिग्ध कार बरामद, लेडी आतंकी शाहीन का नाम जुड़ा, लाल कार से ढ़ोया गया था विस्‍फोटक, फर्जी मान्यता दिखाने पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी को नोटिस
  • फरीदाबाद में खंदावली गांव से विस्फोटक ढोने वाली इकोस्पोर्ट कार बरामद

  • NIA-NSG टीम की फोरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा, आतंकी मॉड्यूल से लिं  

  • खाद से विस्फोटक बनाने का शक, नूंह के डीलर से पूछताछ जारी


दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों को हरियाणा से एक और बड़ा सुराग मिला है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से एक संदिग्ध ब्रेजा कार बरामद की गई है, जो लेडी आतंकी डॉ. शाहीन के नाम पर पंजीकृत है। इस कार की बरामदगी के बाद तीन संदिग्ध गाड़ियां अब NIA की जांच के घेरे में हैं।

फरीदाबाद के खंदावली गांव में बुधवार शाम को लाल रंग की इकोस्पोर्ट कार पुलिस को खड़ी मिली।

इससे पहले, फरीदाबाद के खंदावली गांव में खड़ी लाल रंग की इकोस्पोर्ट कार (DL10CK-0458) की फोरेंसिक जांच में यह खुलासा हुआ था कि इससे विस्फोटक सामग्री की ढुलाई की गई थी। यह वही कार है, जिसका लिंक लाल किले के पास हुए धमाके और आतंकी डॉ. उमर उन नबी से जुड़ चुका है।

फहीम नामक युवक, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर ऑपरेटर है और डॉ. उमर का असिस्टेंट बताया जा रहा है, को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। फहीम ने ही मंगलवार रात यह लाल इकोस्पोर्ट कार गांव में खड़ी की थी।

NIA और NSG टीमें लगातार इलाके में जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने खाद से विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट) तैयार किया था। इसी सिलसिले में नूंह और फरीदाबाद के खाद विक्रेताओं की दुकानें खंगाली जा रही हैं। नूंह निवासी डीलर दिनेश अग्रवाल उर्फ डब्बू को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

इस पूरे नेटवर्क की जांच में अब एजेंसियों को ‘ऑपरेशन’ नामक कोड वर्ड वाली डायरियां और दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिल रहा है कि हरियाणा से आतंकियों की बड़ी साजिश रची जा रही थी।

लाल रंग की गाड़ी को ले जाने के लिए टो वैन मंगवा ली गई है।

फरीदाबाद के खंदावली गांव में खड़ी एक लाल रंग की इकोस्पोर्ट कार (DL10CK-0458) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि इस कार से विस्फोटक सामग्री की ढुलाई की गई थी। यह वही कार है जिसका संबंध लाल किले के पास हुए धमाके और आतंकी डॉ. उमर उन नबी से जोड़ा जा रहा है।

यह कार मंगलवार रात से करीब 18 घंटे तक गांव में खड़ी रही। बुधवार शाम से NIA और NSG की टीमें इसकी जांच में जुटी हैं। मौके से फहीम नामक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी का कंप्यूटर ऑपरेटर और आतंकी डॉ. उमर का असिस्टेंट बताया जा रहा है।

फहीम की बहन का घर गांव में ही है, जहां वह कार खड़ी कर चला गया था। पुलिस ने एहतियात के तौर पर 200 मीटर तक का एरिया सील कर आसपास के घर खाली करा दिए हैं।

जांच के दौरान पुलिस को इस मॉड्यूल से जुड़ी तीसरी ब्रेजा कार अल फलाह यूनिवर्सिटी से बरामद हुई है। यह कार लेडी आतंकी डॉ. शाहीन के नाम पर दर्ज बताई जा रही है। वहीं, चौथी स्विफ्ट डिजायर कार की तलाश जारी है।

सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने खाद से विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट) तैयार किया था। इसी सिलसिले में केंद्रीय एजेंसियां गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह के खाद विक्रेताओं की दुकानें खंगाल रही हैं। नूंह निवासी डीलर दिनेश अग्रवाल उर्फ डब्बू को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

इस बीच, अल फलाह यूनिवर्सिटी से डॉ. उमर और मुजम्मिल से जुड़ी कई डायरियां और दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इनमें 'ऑपरेशन' जैसे कोड वर्ड दर्ज मिले हैं, जिससे आतंकी साजिश का संकेत मिल रहा है।

फर्जी मान्यता दिखाने पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी को नोटिस



नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद को फर्जी तरीके से मान्यता का दावा करने के मामले में शो कॉज नोटिस जारी किया है। NAAC द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी न तो NAAC से मान्यता प्राप्त है और न ही उसने साइकिल-1 के तहत किसी भी मान्यता के लिए आवेदन किया है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर गलत तरीके से यह उल्लेख किया गया है कि इसके संस्थान- अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग — “NAAC से A ग्रेड प्राप्त” हैं।

NAAC ने कहा कि यह जानकारी भ्रामक और जनता को गुमराह करने वाली है, विशेष रूप से छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों के लिए, जो इन दावों के आधार पर निर्णय लेते हैं।

काउंसिल ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह अपना पक्ष स्पष्ट करे और वेबसाइट से गलत जानकारी तुरंत हटाए, अन्यथा उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा की जाने वाली फर्जी मान्यता के दावों पर सवाल उठाता है और यह संदेश देता है कि छात्र प्रवेश से पहले NAAC की आधिकारिक वेबसाइट से संस्थानों की मान्यता की स्थिति जरूर जांचें।