बिस्तर पर जाते ही ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं— कहीं किडनी तो खराब नहीं
समरी डिस्क्रिप्शन (Meta Tags in Hindi) बिस्तर पर जाते ही बार-बार पेशाब, चेहरे या पैरों में सूजन, लगातार थकान या फो़मी यूरिन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें—ये किडनी फेल्योर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। जानिए कौन-से टेस्ट (eGFR, Urine ACR) जरूरी हैं और कब नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करें
➤ रात में अक्सर पेशाब आना (Nocturia)
➤ घुटनों—पैरों—आँखों के आसपास सूजन
➤ बार-बार थकान, भूख घटना और घबराहट
अगर बिस्तर पर जाते ही आपकी नींद टूटती है क्योंकि बार-बार पेशाब की चाह होती है, या सुबह चेहरे-आँखों के पास पफीनैस/सूजन दिखती है, या रोज़ के कामों में असामान्य थकान और भूख की कमी महसूस हो रही है तो इसे हल्के में न लें क्योंकि ये गुर्दे (किडनी) की शुरुआती चिन्हियाँ हो सकती हैं बिस्तर पर दिखने वाले ये लक्षण अक्सर धीरे-धीरे आते हैं और मरीज इन्हें सामान्य थकान या उम्र का असर समझ बैठता है लेकिन असलियत यह है कि गुर्दा जब फ़िल्टरिंग में कमजोर पड़ता है तो शरीर में पानी और प्रोटीन का संतुलन बिगड़ता है जिससे रात में पेशाब की आवृत्ति, मूत्र का झागदार होना (फो़मी यूरिन), और टिशू-स्वेलिंग नजर आती है वहीं विषाक्त पदार्थ रक्त में जमा होने से थकान, भूख घटना, मतली, त्वचा में खुजली और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी शिकायतें जन्म ले लेती हैं
गुर्दे की बीमारी अक्सर बिना किसी विशेष लक्षण के शुरू हो जाती है और यथा-समय जांच न होने पर धीरे-धीरे खराब होकर किडनी फेल्योर तक पहुँच सकती है इसलिए जब बिस्तर पर रहते हुए ये लक्षण नियमित रूप से नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएँ और जरूरी प्रारंभिक जाँच कराएँ — ब्लड क्रिएटिनिन से eGFR, मूत्र में प्रोटीन मापने के लिए Urine ACR (albumin-to-creatinine ratio) और साधारण यूरिन टेस्ट ये तीन परीक्षण शुरुआती अवस्था का स्पष्ट संकेत देते हैं, और यदि रोगी मधुमेह या उच्च रक्तचाप के जोखिम वाले समूह में हैं तो सावधानी और भी जरूरी है
गुर्दे की बीमारी का पता लगाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देश बताते हैं कि उच्च-जोखिम वाले लोगों- जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड-प्रेशर, हृदयरोग, पुराने गुर्दे की समस्या या परिवार इतिहास वाले व्यक्तियों— में नियमित स्क्रीनिंग (eGFR और ACR) कराना चाहिए क्योंकि प्रारंभिक स्टेज में बहुत से मरीजों को कोई शिकायत नहीं होती पर सरल ब्लड और यूरिन टेस्ट से स्थिति पकड़ी जा सकती है और समय रहते रोकथाम व उपचार से बीमारी को धीमा या रुकाया जा सकता है!
डॉक्टरी सलाह और बचाव-उपाय — अगर आप बिस्तर पर जाते ही बार-बार उठते हैं, यूरिन झागदार होता है, पैरों-गुटनों में सूजन दिखे, जी मचलना या लगातार थकान रहे तो तुरंत अपने प्राथमिक चिकित्सा-डॉक्टर या नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करें; डॉक्टर संभवतः ब्लड प्रोटीन/क्रिएटिनिन-eGFR, यूरिन-ACR और आवश्यकतानुसार अल्ट्रासाउंड निर्देशित करेंगे, साथ ही जीवनशैली में नमक-कमी, ब्लड-प्रेशर और शुगर नियंत्रण, पेनकिलर (NSAIDs) का उपयोग सीमित रखना और उचित पानी का सेवन जैसी सलाह दी जाती है क्योंकि समय रहते कदम उठाने से किडनी की जीर्णता रोकी जा सकती है और डायलिसिस की आवश्यकता टाली जा सकती है!
Akhil Mahajan