होली 2026 पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया, जानें पूजा-दहन का सही समय और भारत में प्रभाव

होली 2026 पर 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया रहेगा। जानें सूतक काल, ग्रहण का समय और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है।

होली 2026 पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया, जानें पूजा-दहन का सही समय और भारत में प्रभाव

3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण, शाम 3:20 से 6:47 तक प्रभाव
भद्रा और सूतक के कारण बदलेगा होलिका दहन का समय
ग्रहण समाप्ति के बाद शाम 7 से 8:50 बजे तक शुभ मुहूर्त



इस वर्ष होली 2026 धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से विशेष मानी जा रही है, क्योंकि 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन ही साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगी और इसका समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। तिथि विचार से 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि 4 मार्च 2026 को रंगों की होली खेली जाएगी।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 3 मार्च को लगने वाला यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत द्वीपों और उत्तर व दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देगा, जिसे खगोल विज्ञान में ब्लड मून कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के कारण सूतक काल भारत में सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। सूतक के दौरान पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त 3 मार्च को भद्रा काल भी सुबह 1 बजकर 25 मिनट से सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। भद्रा में होलिका दहन करना शास्त्रों में निषिद्ध बताया गया है।

ऐसे में दिन में भद्रा और शाम तक ग्रहण का प्रभाव रहने के कारण होलिका दहन ग्रहण समाप्त होने के बाद ही किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार शुभ मुहूर्त शाम 7 बजे से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इसी समय विधि-विधान से पूजा और दहन करना उत्तम माना गया है।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व है। प्रह्लाद और होलिका की कथा इस दिन विशेष रूप से स्मरण की जाती है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजन और अग्नि प्रदक्षिणा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस बार ग्रहण और भद्रा के संयोग के कारण श्रद्धालुओं को समय का विशेष ध्यान रखना होगा।