एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उत्तर-दक्षिण शास्त्रीय संगीत व नृत्य का अनमोल संगम देख दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में संस्कृति मंत्रालय व पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी के सहयोग से उत्तर-दक्षिण शास्त्रीय संगीत व नृत्य श्रृंखला का भव्य आयोजन हुआ। भरतनाट्यम व कत्थक के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की एकता प्रदर्शित की गई।
➤ एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में हुआ उत्तर-दक्षिण शास्त्रीय संगीत व नृत्य श्रृंखला का भव्य आयोजन
➤ भरतनाट्यम व कत्थक के माध्यम से भारतीय संस्कृति की एकता का प्रभावशाली प्रदर्शन
➤ पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी व संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास
पानीपत, 09 सितंबर 2025
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘उत्तर दक्षिण – शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भरतनाट्यम नृत्य में विदुषी आरथी इयंगर और कत्थक नृत्य में विदुषी असावरी पवार ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी दिल्ली के सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलन से हुई और मंच संचालन डॉ. मोनिका खुराना ने किया। इस अवसर पर बॉलीवुड और टेलीविजन की मशहूर अदाकारा रजनी गुप्ता, पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी दिल्ली के सेक्रेटरी ललित नारंग, सदस्य प्रशांत व सीमा, कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, उप-प्रधान राजीव गर्ग, जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रस्तुतियां देखने वालों के लिए यादगार बनीं। विदुषी असावरी पवार ने गणेश स्तुति, “बाजत मृदंग नाचत शिवा शम्भू” और कृष्ण भक्ति पर आधारित कत्थक नृत्य से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भावपूर्ण नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, विदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्यम के माध्यम से अद्भुत भाव-भंगिमाओं का प्रदर्शन किया, जिसने कार्यक्रम को शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय बना दिया।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने बताया कि पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत एक गैर सरकारी संस्था है, जो भारतीय सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस संस्था का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत, नृत्य, नाटक, ललित कला और शिल्प कला में प्रशिक्षण देना, युवा प्रतिभाओं को पोषित करना और वैश्विक कलात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। ‘उत्तर दक्षिण – शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ जैसी पहलों के माध्यम से यह सोसाइटी उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं को एक मंच पर लाकर युवाओं को हमारी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम कर रही है।
विदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्यम नृत्य में अपनी महारत का प्रदर्शन किया। वे आचार्य कलैवनी राजमोहन की शिष्या हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई मंचों पर भरतनाट्यम का प्रदर्शन कर अपने उत्कृष्ट नृत्य कौशल को साबित किया है। उन्हें ‘संगीत में उत्कृष्टता’, एनएसयूआई सांस्कृतिक उत्सव 2019 में द्वितीय स्थान, दिल्ली की राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में तृतीय स्थान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
विदुषी असावरी पवार को कत्थक नृत्य में महारत हासिल है। वे पद्मश्री गुरु प्रताप पवार, एमबीई की पुत्री हैं। बचपन से ही उन्होंने इस कला में प्रवीणता हासिल की और लंदन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने भारतीय कथक नृत्य को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर अपने कला प्रेम और प्रतिभा का प्रमाण दिया है।
इस अवसर पर प्रो प्रवीण खेरडे, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, डॉ दीपा वर्मा, डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ वीरेंद्र गिल, प्रो संजय चोपड़ा, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ रेखा व डॉ कविता सहित कई अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि पानीपत शहर के लिए यह दिन ऐतिहासिक है क्योंकि इतने उच्च कोटि के दो कलाकारों ने अपनी कला को इस मंच पर प्रस्तुत किया। इस तरह के आयोजन भारतीय संस्कृति और कला की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और नए युवाओं में जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।