परीक्षा पेपर टेंपरिंग की पुष्टि के बाद परिजनों ने की दोषियों पर कार्रवाई की मांग

बिलासपुर में फॉरेंसिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की पुष्टि के बाद परिजनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परीक्षा पेपर टेंपरिंग की पुष्टि के बाद परिजनों ने की दोषियों पर कार्रवाई की मांग

फॉरेंसिक रिपोर्ट में कॉपियों से छेड़छाड़ की पुष्टि, परिजनों में आक्रोश
दोषियों पर सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मेरिट प्रभावित होने पर छात्रों ने ग्रेस नंबर देने की उठाई मांग


बिलासपुर जिले में स्कूल शिक्षा बोर्ड की फॉरेंसिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद छात्रों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

झंडूता विधानसभा क्षेत्र के ज्योरा स्कूल के पूर्व छात्रों की कॉपियों में गड़बड़ी का खुलासा फॉरेंसिक रिपोर्ट में हुआ है। इसके बाद छात्र और अभिभावक परिधि गृह में एकत्रित हुए और प्रेस वार्ता कर पूरे मामले को सार्वजनिक किया। परिजनों का कहना है कि यह प्रदेश के शिक्षा इतिहास में बेहद गंभीर और शर्मनाक घटना है, जिसमें सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।

परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस परीक्षा केंद्र पर परीक्षा आयोजित हुई, वहीं उसे एग्जामिनेशन कलेक्शन सेंटर भी बना दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इसी लापरवाही और सिस्टम की खामियों के चलते उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की गई।

फॉरेंसिक रिपोर्ट 9 फरवरी 2026 को ही आ गई थी, लेकिन अभिभावकों को इसकी जानकारी काफी देर से दी गई। इससे भी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि जांच कमेटी में उनके प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके।

छात्रों ने बताया कि इस गड़बड़ी के कारण उनके नंबर कम आए, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और वे छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं से वंचित रह गए। उन्होंने मानसिक तनाव का भी जिक्र किया और बोर्ड से मांग की कि उन्हें ग्रेस नंबर दिए जाएं।

मामले में समाजसेवियों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अब सभी की नजर शिक्षा बोर्ड और सरकार की कार्रवाई पर टिकी है कि इस गंभीर मामले में दोषियों के खिलाफ कब और क्या कदम उठाए जाते हैं।