‘पनौती’ कहे जाने से लेकर स्टार बनने तक तापसी का सफर फ्लॉप फिल्मों के बाद भी नहीं मानी हार
तापसी पन्नू ने खुलासा किया कि शुरुआती फ्लॉप फिल्मों के कारण उन्हें ‘पनौती’ कहा गया, लेकिन ‘पिंक’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
■ फ्लॉप फिल्मों के बाद तापसी को कहा गया ‘पनौती’
■ लुक और काबिलियत को लेकर खुद पर था संदेह
■ ‘पिंक’ से बदली पहचान, कंटेंट फिल्मों से बनाई अलग जगह
दिल्ली के साधारण परिवार से निकलकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाली तापसी पन्नू का सफर संघर्ष, आत्म-संदेह और लगातार मेहनत की मिसाल है। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि करियर के शुरुआती दौर में लगातार फिल्मों के फ्लॉप होने के कारण उन्हें ‘पनौती’ तक कहा गया, जिसने उनके आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया।तापसी ने बताया कि वह कभी अभिनेत्री बनने की योजना लेकर इंडस्ट्री में नहीं आई थीं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी कर रही थीं और मॉडलिंग को सिर्फ एक्स्ट्रा कमाई के लिए शुरू किया था। लेकिन धीरे-धीरे यही काम उनका करियर बन गया।
साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री के बाद उन्हें शुरुआत में सिर्फ ग्लैमरस रोल्स तक सीमित रखा गया, जिससे वह संतुष्ट नहीं थीं। कई फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन न करने की वजह से उन्हें ‘अनलकी’ और ‘पनौती’ जैसे टैग दिए गए। यह दौर उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन रहा, जहां वह अपने लुक, आत्मविश्वास और काबिलियत को लेकर असुरक्षित महसूस करती थीं।
बॉलीवुड में चश्मे बद्दूर से डेब्यू के बाद भी उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। लगातार औसत या फ्लॉप फिल्मों ने उनके करियर को मुश्किल दौर में डाल दिया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट पिंक साबित हुई। इस फिल्म ने न केवल उनकी इमेज बदली, बल्कि उन्हें एक गंभीर और दमदार अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद तापसी ने कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों को चुना और इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।तापसी का मानना है कि असफलताएं ही उन्हें मजबूत बनाती हैं। उन्होंने हर नाकामी से सीख ली और अपने करियर के फैसलों को बेहतर बनाया। आज वह उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपने दम पर कंटेंट आधारित सिनेमा में खास जगह बनाई है।उनकी यह कहानी दिखाती है कि शुरुआती असफलताएं किसी भी कलाकार का अंत नहीं होतीं, बल्कि सही दिशा में मेहनत और धैर्य से वही असफलताएं सफलता की नींव बन सकती हैं।
shubham