फंसे अजय चौटाला! DGP-SP को शिकायत, देशद्रोह की FIR दर्ज करने की मांग
अजय चौटाला के बयान पर देशद्रोह की FIR की मांग को लेकर DGP और SP को शिकायत दी गई है। नेपाल-बांग्लादेश जैसे तख्तापलट की भाषा से हरियाणा की राजनीति गरमा गई।
➤ अजय चौटाला के बयान पर देशद्रोह की मांग
➤ DGP-SP को शिकायत, तख्तापलट की भाषा पर बवाल
➤ राजनीति गरमाई, बयान बनाम कानून आमने-सामने
जननायक जनता पार्टी के सुप्रीमो डॉ. अजय चौटाला के एक बयान ने हरियाणा की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके खिलाफ देशद्रोह की FIR दर्ज करने की मांग को लेकर चरखी दादरी के एडवोकेट प्रदीप कालीरमन ने SP और हरियाणा DGP को लिखित शिकायत दी है। मामला सीधे तौर पर संविधान, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ता नजर आ रहा है।
शिकायत में कहा गया है कि अजय चौटाला ने 28 दिसंबर को महेंद्रगढ़ में आयोजित युवा योद्धा सम्मेलन के दौरान ऐसा बयान दिया, जो हिंसा को भड़काने, सरकार को उखाड़ फेंकने और तख्तापलट की मानसिकता को बढ़ावा देने वाला है। एडवोकेट का दावा है कि यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है।
एडवोकेट प्रदीप कालीरमन के अनुसार, उन्होंने अजय चौटाला का बयान यूट्यूब वीडियो के जरिए देखा। इसमें अजय चौटाला ने कहा था कि जिस तरह नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में युवाओं ने सरकारों को सत्ता से बाहर किया, उसी तरह यहां भी शासकों को गद्दी से खींचकर सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटना पड़ेगा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक शासन को चुनौती देती है और हिंसक विद्रोह को उकसाती है। इसी आधार पर उन्होंने चरखी दादरी SP अर्श वर्मा, हरियाणा DGP और मुख्य सचिव को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह के बयान देना कानून व्यवस्था बिगाड़ने और अराजकता फैलाने की मंशा को दर्शाता है। अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि क्या इस बयान को राजनीतिक भाषण माना जाएगा या कानूनी अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।
विवाद बढ़ने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पिता के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अजय चौटाला का बयान युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ था। दुष्यंत चौटाला ने HTET परीक्षा गड़बड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि जब युवाओं के साथ अन्याय होता है, तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है।
उन्होंने कहा कि गलत करने वालों को पकड़ने की बात को गलत अर्थों में लिया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है।
Akhil Mahajan