विवेक से जगत का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

समालखा में आयोजित 78वां निरंकारी संत समागम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद के साथ संपन्न हुआ। उन्होंने आत्ममंथन और विवेकपूर्ण जीवन का संदेश देते हुए मानवता में शांति, प्रेम और सुधार की प्रेरणा दी।

विवेक से जगत का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

• सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने आत्ममंथन और विवेकपूर्ण जीवन का दिया संदेश
• 78वें निरंकारी संत समागम में लाखों श्रद्धालुओं ने लिया आत्मसुधार का संकल्प
• कवि दरबार में 38 कवियों ने प्रस्तुत कीं रचनाएं, ‘आत्ममंथन’ रहा मुख्य विषय


समालखा। आत्मसुधार से जगत सुधार का दिव्य संदेश देते हुए 78वां निरंकारी संत समागम प्रेम और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने समापन सत्र में उपस्थित लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि निराकार परमात्मा ने जो यह जगत बनाया है, उसकी हर चीज खूबसूरत है। उन्होंने कहा कि इंसान को इस सुंदर सृष्टि का आनंद लेना चाहिए लेकिन विवेक बुद्धि से इसका सदुपयोग करना चाहिए, दुरुपयोग नहीं।

सतगुरु माता जी ने कहा कि मन को विचलित करने वाले अनेक विचार आते रहते हैं, लेकिन आत्ममंथन के माध्यम से व्यक्ति इनसे ऊपर उठ सकता है। उन्होंने कहा कि जब हर कार्य ईश्वर की उपस्थिति के भाव से किया जाता है तो मन की उथल-पुथल समाप्त हो जाती है और जीवन में शांति तथा सुकून की अनुभूति होती है। आत्ममंथन से व्यक्ति न केवल मानसिक और भावनात्मक रूप से बल्कि आत्मिक रूप से भी समृद्ध होता है।

उन्होंने दृष्टिकोण के महत्व को एक उदाहरण से समझाया— एक व्यक्ति बगीचे में फूल देखकर कहता है कि यहां तो कांटे हैं, जबकि दूसरा कहता है कि कितने सुंदर फूल हैं और कांटे उनकी रक्षा कर रहे हैं। माता जी ने कहा कि यह दृष्टिकोण ही है जो जीवन को आनंद या दुख से भर देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे समागम से मिली शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और इस सत्य एवं अच्छाई को पूरे जगत तक पहुंचाएं।

समापन सत्र में समागम कमेटी के समन्वयक जोगिंदर सुखीजा ने सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकारी विभागों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और बताया कि इस वर्ष समागम में श्रद्धालुओं की संख्या पहले से अधिक रही।

इस वर्ष समागम में चारों दिन कवि दरबार का आयोजन हुआ जिसमें 38 कवियों ने ‘आत्ममंथन’ विषय पर कविताएं प्रस्तुत कीं। बाल, महिला और पुरुष कवियों ने हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी, हरियाणवी, मुलतानी, मराठी और उर्दू में अपनी रचनाओं से समागम स्थल को भक्तिभाव से भर दिया। श्रोताओं ने कविताओं का भरपूर आनंद लिया और सतगुरु माता जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प लिया।