जाट के आंगन से उठी अनाथ वाल्मीकि बेटी की डोली, पूरे गांव की आंखें हुई नम!
नागौर के चाऊ गांव में जाट किसान देवाराम जाखड़ ने अनाथ वाल्मीकि बेटी पुष्पा की शादी कर मानवता की मिसाल पेश की। गांव की आंखें नम, वातावरण भावुक।
-
जाट परिवार ने अनाथ वाल्मीकि बेटी की शादी कर मानवता का उदाहरण पेश किया
-
देवाराम जाखड़ ने पुष्पा को बेटी मानकर पूरे रीति-रिवाज से विदा किया
-
गांव की आंखें नम, सामाजिक सौहार्द और जातीय बंधन टूटने की मिसाल
राजस्थान के नागौर जिले के चाऊ गांव में जाति और धर्म की संकरी दीवारों को तोड़ते हुए एक किसान पिता ने मानवता की सबसे ऊँची मिसाल पेश की है। वाल्मीकि परिवार की अनाथ बेटी पुष्पा के लिए, जाट किसान देवाराम जाखड़ ने न केवल शादी का पूरा खर्च उठाया, बल्कि उसे अपनी बेटी मानकर, अपने घर के आंगन से धूमधाम से विदा किया।
पुष्पा के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका था। ऐसे में देवाराम जाखड़ और उनके परिवार ने उसे सहारा दिया और 29 नवंबर को उसकी शादी का जिम्मा उठाया। यह शादी सिर्फ एक विवाह नहीं थी, बल्कि सामाजिक सद्भाव का एक महाकाव्य थी।
देवाराम जाखड़ ने अपनी दरियादिली यहीं नहीं रोकी। उन्होंने शादी के कार्ड में वर-वधू के माता-पिता की जगह अपना नाम लिखवाया और विवाह स्थल अपने घर को 'जाखड़ भवन' का नाम दिया। उन्होंने इस पवित्र रिश्ते को जाति की बेड़ियों से मुक्त रखने के लिए कार्ड पर डॉ. अंबेडकर और भगतसिंह जैसे महापुरुषों के संदेश भी छपवाए।
जब पुष्पा की डोली जाखड़ परिवार के आंगन से उठी, तो पूरा गांव भावुक हो उठा। देवाराम जाखड़ ने कन्यादान की रस्म निभाकर यह सिद्ध कर दिया कि रिश्तों का आधार खून नहीं, बल्कि दिल की पवित्र भावनाएं होती हैं। उनके इस कदम ने सदियों पुरानी जातिगत संकीर्णता पर गहरा प्रहार किया है और दिखाया है कि सेवा और अपनत्व के आगे सभी भेद छोटे पड़ जाते हैं।
यह शादी सिर्फ दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दो समाजों के बीच प्रेम और सम्मान का अटूट बंधन है।
Author1