हरियाणा की हवा में जहर: तीन दिन में दूसरी बार रोहतक देश का सबसे प्रदूषित शहर

हरियाणा में वायु प्रदूषण चरम पर है। रोहतक तीन दिन में दूसरी बार देश का सबसे प्रदूषित शहर बना, जहां AQI 389 दर्ज किया गया। पराली जलाने, धूल और धुएं से हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

हरियाणा की हवा में जहर: तीन दिन में दूसरी बार रोहतक देश का सबसे प्रदूषित शहर

  • तीन दिन में दूसरी बार रोहतक देश का सबसे प्रदूषित शहर बना, एक्यूआई 389 दर्ज

  • हरियाणा के छह शहर टॉप-9 प्रदूषित शहरों में शामिल, चरखी दादरी और बल्लभगढ़ नए हॉटस्पॉट

  • पराली जलाने के 118 मामले, पीएम2.5 और धूल के कारण वायु गुणवत्ता बेहद खराब


हरियाणा की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को राज्य के कई शहरों में सूर्य के दर्शन तक नहीं हो सके। रोहतक एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। यहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज हुआ, जो “बेहद खराब श्रेणी” में आता है। यह तीन दिनों में दूसरी बार है जब रोहतक ने देश में सबसे प्रदूषित शहर का स्थान प्राप्त किया।

30 अक्टूबर को भी रोहतक का एक्यूआई 426 (गंभीर श्रेणी) दर्ज हुआ था। देश के 9 सबसे प्रदूषित शहरों में 6 हरियाणा के हैं — चरखी दादरी, बल्लभगढ़, फतेहाबाद, जींद, कैथल और रोहतक।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सीजन में एक ही दिन में सबसे ज्यादा 19 पराली जलाने के मामले एक नवंबर को सामने आए। इससे प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई और पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुकीं, तो आने वाले हफ्तों में वायु गुणवत्ता “गंभीर श्रेणी” तक जा सकती है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए खतरा बढ़ जाएगा।


➤ वायु गुणवत्ता रिपोर्ट

शहर AQI (1 नवंबर) श्रेणी
रोहतक 389 बेहद खराब
चरखी दादरी 375 बेहद खराब
बल्लभगढ़ 319 बेहद खराब
फतेहाबाद 334 बेहद खराब
जींद 330 बेहद खराब
कैथल 324 बेहद खराब
दिल्ली 303 बेहद खराब
बागपत 321 बेहद खराब
मेरठ 326 बेहद खराब

एक दिन पहले भिवानी का एक्यूआई 406 दर्ज किया गया था, जो उस समय देश में सबसे अधिक था। वहीं बल्लभगढ़ (320), सोनीपत (317) और फतेहाबाद (309) जैसे शहर भी “खराब श्रेणी” में बने हुए हैं।


➤ प्रदूषण के कारण

चंडीगढ़ पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल के अनुसार —
“हरियाणा के कई शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। प्रदूषण का मुख्य कारण पीएम2.5 कण, धूल और धुआं हैं। वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और स्थानीय उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन ने हवा को जहरीला बना दिया है।”

उन्होंने बताया कि उत्तर-पश्चिमी हवाएं पंजाब और आसपास के राज्यों से पराली जलाने का धुआं लेकर हरियाणा तक पहुंचा रही हैं। रात का तापमान गिरने और बारिश की कमी से हवा की प्राकृतिक सफाई नहीं हो पा रही, जिससे प्रदूषण और जमता जा रहा है।


➤ पराली जलाने के आंकड़े

हरियाणा में अब तक 118 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक

  • जींद – 26

  • कैथल – 17

  • फतेहाबाद – 15 मामले रिपोर्ट हुए हैं।

19 अक्टूबर को एक दिन में सबसे अधिक 13 घटनाएं दर्ज की गई थीं।