CMO ऑफिस में 3.25 लाख की रिश्वत लेते सहायक रंगे हाथों गिरफ्तार, डायग्नोस्टिक सेंटर की NOC के लिए मांगे थे 5 लाख
गुरुग्राम CMO ऑफिस में सहायक सुभाष शर्मा 3.25 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार। डायग्नोस्टिक सेंटर की NOC के लिए मांगे थे 5 लाख। एसीबी टीम ने ट्रैप लगाकर पकड़ा।
• गुरुग्राम CMO ऑफिस में 3.25 लाख की रिश्वत लेते सहायक सुभाष शर्मा रंगे हाथों गिरफ्तार
• डायग्नोस्टिक सेंटर की NOC के लिए 5 लाख मांगे, 3.25 लाख में सौदा तय
• एसीबी फरीदाबाद टीम ने ट्रैप लगाकर पकड़ा, आरोपी न्यायिक हिरासत में
गुरुग्राम के सीएमओ ऑफिस में बड़ा रिश्वत कांड सामने आया है। हरियाणा स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की फरीदाबाद ब्रांच ने सहायक सुभाष शर्मा को 3 लाख 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह राशि उसके पिट्ठू बैग से बरामद की गई।
यह रिश्वत डायग्नोस्टिक सेंटर की NOC जारी करने के बदले ली जा रही थी। पहले 5 लाख रुपए की मांग हुई थी, बाद में 3.25 लाख में सौदा तय किया गया। शिकायतकर्ता की सूचना पर एसीबी टीम ने सीएमओ ऑफिस में जाल बिछाया और आरोपी को बैग में नकद रखते ही पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
एटरिम डायग्नोस्टिक (अब Alfa Diagnostics) के सेंटर मैनेजर ने बताया कि उन्होंने अपना सेंटर बेच दिया था और नई कंपनी को मशीन ट्रांसफर व अन्य NOC चाहिए थी। इसके लिए 31 अक्टूबर 2025 को आवेदन दिया गया। मामला PNDT श्रेणी से जुड़ा होने के कारण यह डिप्टी CMO के पास भेजा गया।
क्लर्क सुभाष शर्मा ने आवेदन पर बेवजह आपत्तियां लगा दीं। 21 नवंबर को सभी जवाब जमा करने के बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ी। आरोप है कि सुभाष ने कहा कि अल्ट्रासाउंड मशीन ट्रांसफर पास करवाने हों तो पैसे देने होंगे।
कई दौर की बातचीत के बाद 3.25 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। शिकायत मिलने पर एसीबी टीम ने ट्रैप प्लान किया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने नकद सौंपा और सुभाष ने पैसे बैग में रखे, टीम ने दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।
नोटों पर लगाया गया केमिकल पाउडर आरोपी के हाथों पर चमक उठा, जिससे रिश्वत की पुष्टि हो गई। विजिलेंस अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम किया जा रहा है। यदि कोई कर्मचारी रिश्वत मांगे तो 1800-180-2022 और 1064 पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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