मध्य पूर्व में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की एंट्री: ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर
अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत मध्य पूर्व में तैनात किए हैं। ईरान और हिज़्बुल्लाह ने हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी दी है। फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
- अमेरिका ने मध्य पूर्व में एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात किए
- ईरान और हिज़्बुल्लाह ने हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी दी
- तनाव बढ़ा, लेकिन फिलहाल युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं
मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोतों को इस क्षेत्र की ओर भेज दिया है। मुख्य रूप से USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर समूह की तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी नौसेना के अनुसार यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि ईरान और उससे जुड़े संगठनों ने इसे सैन्य दबाव के रूप में देखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी युद्धपोत और मिसाइल विध्वंसक जहाज ईरान के काफ़ी नजदीक तैनात किए गए हैं।
ईरान ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका किसी भी तरह की निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है, और अगर हमला किया गया तो तेज़ और सख्त जवाब दिया जाएगा।
तनाव बढ़ने के संकेत तब और साफ हो गए जब ईरान-समर्थित मिलिशिया समूहों ने भी चेतावनी जारी की। इराक और यमन में सक्रिय इन संगठनों ने कहा कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई की स्थिति में पूरे संघर्ष की आशंका बन सकती है।
लेबनान का संगठन हिज़्बुल्लाह भी खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आया है। हालांकि संगठन के कुछ राजनीतिक नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि वे बिना सोचे-समझे सीधे युद्ध में कूदने के पक्ष में नहीं हैं।
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि अमेरिका ने इस तैनाती के साथ F-35 और F-15 जैसे लड़ाकू विमान और उन्नत मिसाइल सिस्टम भी इलाके में सक्रिय किए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव का नतीजा है। दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी, प्रतिबंध, और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर टकराव लगातार बना हुआ है।
फिलहाल स्थिति युद्ध की पुष्टि नहीं करती, लेकिन बढ़ती सैन्य गतिविधियां और तीखे बयान यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि मध्य पूर्व एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है।
Akhil Mahajan