दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर रिश्वतखोरी: 44 हजार की रिश्वत लेते CMO कार्यालय का ड्राइवर गिरफ्तार
जींद नागरिक अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 44 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए CMO कार्यालय के ड्राइवर जगदीश को ACB सिरसा ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- जींद नागरिक अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 44 हजार की रिश्वत लेते CMO कार्यालय का ड्राइवर गिरफ्तार
- ACB सिरसा की ट्रैप कार्रवाई में आरोपी जगदीश रंगे हाथ दबोचा गया
- रिश्वत की रकम बरामद, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू
जींद के नागरिक अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) सिरसा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए CMO कार्यालय के ड्राइवर जगदीश को 44 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने एंटी करप्शन ब्यूरो सिरसा को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया के लिए उससे 44 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए उसका काम नहीं किया जा रहा था।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने पूरे मामले का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना तैयार की।
योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि देकर आरोपी से संपर्क करने के लिए कहा गया। एसीबी अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई पर नजर रखते हुए ट्रैप बिछाया ताकि रिश्वत लेते समय आरोपी को पकड़ा जा सके।
निर्धारित योजना के अनुसार आरोपी जगदीश को नागरिक अस्पताल के मुख्य गेट के पास स्थित वीटा बूथ के नजदीक बुलाया गया। जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से 44 हजार रुपये की रिश्वत राशि ली, शिकायतकर्ता ने पहले से तय संकेत एसीबी टीम को दे दिया।
संकेत मिलते ही एसीबी सिरसा की टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और रिश्वतखोरी में शामिल किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले में यह भी जांच की जा रही है कि रिश्वत मांगने और लेने की इस प्रक्रिया में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
दिव्यांग प्रमाण पत्र सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि पात्र लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित एजेंसी को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
Akhil Mahajan