क्या तिरुपति लड्डू में मिला बाथरूम क्लीनर जैसा केमिकल? नायडू के दावे से बढ़ा सियासी घमासान

तिरुपति लड्डू विवाद में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बाथरूम क्लीनर जैसे रसायनों से बने घी का दावा किया। NDDB रिपोर्ट, राजनीति और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा।

क्या तिरुपति लड्डू में मिला बाथरूम क्लीनर जैसा केमिकल?  नायडू के दावे से बढ़ा सियासी घमासान

➤ तिरुपति लड्डू में बाथरूम क्लीनर जैसे रसायनों से बने घी का दावा
➤ NDDB लैब रिपोर्ट में पशु वसा और मिलावट की पुष्टि का आरोप
➤ पूर्व TTD अध्यक्ष द्वारा मिलावट स्वीकारने का दावा, सियासी घमासान तेज


आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के एक बयान ने देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार के कार्यकाल में भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किए जाने वाले तिरुपति लड्डू ऐसे घी से बनाए गए, जिसमें बाथरूम की सफाई में इस्तेमाल होने वाले रसायन शामिल थे। यह आरोप केवल खाद्य मिलावट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री नायडू ने यह बयान कर्नूल जिले के येम्मिगानुर में ‘आपकी भूमि–आपका अधिकार’ और पट्टेदार पासबुक वितरण कार्यक्रम के दौरान एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में YSRCP सरकार के दौरान रसायनों से बने घी से ‘प्रसाद’ तैयार किया गया, जिससे श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंची।

नायडू ने आरोप लगाया कि शुद्ध गाय के घी की जगह पशुओं की चर्बी और रासायनिक तत्वों से युक्त घटिया घी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि YSRCP नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें सीबीआई से क्लीनचिट मिल चुकी है, लेकिन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व अध्यक्ष और उनके चाचा वाई.वी. सुब्बा रेड्डी ने स्वयं स्वीकार किया था कि लड्डू के घी में मिलावट हुई थी

इस पूरे विवाद को और गंभीर बनाती है नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की वह लैब रिपोर्ट, जिसे टीडीपी ने सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट के अनुसार, घी के नमूनों में बीफ टैलो (Beef Tallow), सूअर की चर्बी (Lard) और मछली के तेल (Fish Oil) की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इसके साथ ही पाम ऑयल और अन्य सस्ते वनस्पति तेलों की मिलावट का भी दावा किया गया है। घी की शुद्धता जांचने वाला S-Value टेस्ट मानक से काफी नीचे पाया गया, जिससे यह नमूना फेल घोषित हुआ।

मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किया गया “बाथरूम क्लीनर” शब्द राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। नायडू का कहना है कि घी के निर्माण में ऐसे रसायनों का उपयोग किया गया, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर औद्योगिक सफाई उत्पादों में किया जाता है। आरोप है कि घी की मात्रा बढ़ाने और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इन हानिकारक रसायनों का सहारा लिया गया।

विवाद के सामने आने के बाद TTD प्रशासन ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। जिन आपूर्तिकर्ताओं के घी के नमूने फेल पाए गए, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। मंदिर परिसर और रसोई (पोटू) में शांति होमम और शुद्धिकरण अनुष्ठान कराए गए हैं। साथ ही, गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) के ‘नंदिनी’ ब्रांड के घी की आपूर्ति फिर से शुरू की गई है।

राजनीतिक मोर्चे पर YSRCP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे घृणित राजनीति बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि “भगवान को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए”, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।