सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम, बीजेपी ने क्यों चुना गठबंधन का रास्ता

अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनीं। बहुमत के बावजूद बीजेपी के इस फैसले ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया।

सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम, बीजेपी ने क्यों चुना गठबंधन का रास्ता

➤ सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम
➤ अजित पवार के निधन के बाद खाली हुआ था पद
➤ बहुमत के बावजूद बीजेपी के फैसले ने बढ़ाई सियासी चर्चा


महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ देखने को मिला, जब एनसीपी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गई हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह मुंबई स्थित लोक भवन में शाम पांच बजे आयोजित हुआ, जहां राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

28 जनवरी को हुए विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद उपमुख्यमंत्री का पद खाली हो गया था। ऐसे में सत्ता पक्ष को यह फैसला लेना था कि इस संवेदनशील और अहम पद पर किसे जिम्मेदारी सौंपी जाए। बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी के गठबंधन की सरकार होने के बावजूद सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने से सियासी हलकों में कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बीजेपी विधानसभा में लगभग अपने दम पर बहुमत के करीब पहुंच चुकी थी, तब भी उसने यह पद अपने पास क्यों नहीं रखा। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 288 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 सीटों की जरूरत थी। बीजेपी को अकेले 132 सीटें मिली थीं, जो पूर्ण बहुमत से सिर्फ कुछ सीटें कम थीं। इसके बावजूद पार्टी ने अपने सहयोगी दलों शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी को सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम केवल संख्या बल की राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और भविष्य की रणनीति से जुड़ा है। एनसीपी का मराठा वोट बैंक और अजित पवार की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाना गठबंधन को मजबूत बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है। इसके साथ ही महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश भी इस फैसले के जरिए दिया गया है।

सुनेत्रा पवार का राजनीतिक सफर भले ही अपेक्षाकृत शांत रहा हो, लेकिन राज्यसभा सांसद के रूप में उनकी सक्रियता और सामाजिक मुद्दों पर पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है। अजित पवार के निधन से बनी सहानुभूति लहर और एनसीपी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिहाज से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है।