लल्लनटॉप के बाद क्या, सौरभ द्विवेदी के अगले कदम पर नजर...
द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक सौरभ द्विवेदी ने इंडिया टुडे हिंदी के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। 12 साल बाद सब्बैटिकल पर जाने की घोषणा की।
➤ द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक सौरभ द्विवेदी ने दिया इस्तीफा
➤ 12 साल बाद इंडिया टुडे ग्रुप से किया किनारा, सब्बैटिकल की घोषणा
➤ इंडिपेंडेंट डिजिटल ब्रांड शुरू करने की अटकलें तेज
अखिलेश महाजन
डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले 'द लल्लनटॉप' के संस्थापक संपादक और इंडिया टुडे (हिंदी) के संपादक सौरभ द्विवेदी (Saurabh Dwivedi) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंडिया टुडे ग्रुप के साथ अपनी 12 साल लंबी और बेहद सफल पारी को विराम देते हुए सौरभ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी विदाई की घोषणा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में 'द लल्लनटॉप' को अपनी पहचान, सबक और हौसले के लिए शुक्रिया अदा किया और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
सौरभ द्विवेदी ने भले ही अपने इस्तीफे के साथ 'अध्ययन अवकाश' (Sabbatical) शब्द का प्रयोग किया है, लेकिन मीडिया जगत में इसे एक 'बड़े तूफान से पहले की शांति' के रूप में देखा जा रहा है। 12 साल तक इंडिया टुडे ग्रुप जैसे बड़े संस्थान के साथ काम करने के बाद सौरभ अब अपनी खुद की एक नई लकीर खींचने की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो वे अब किसी अन्य संस्थान में नौकरी करने के बजाय खुद का इंडिपेंडेंट डिजिटल ब्रांड स्थापित करेंगे, जिसमें कंटेंट की पूरी स्वतंत्रता होगी।
क्या होगा नए वेंचर में खास?
चर्चा है कि सौरभ का नया प्रोजेक्ट केवल राजनीतिक खबरों तक सीमित नहीं रहेगा। वे साहित्य, विज्ञान, और गहन शोध (Deep Research) आधारित पत्रकारिता को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं। उनके हालिया सोशल मीडिया पोस्ट और 'अध्ययन' की बात इस ओर इशारा करती है कि वे कुछ समय के लिए वैचारिक रूप से खुद को और मजबूत करना चाहते हैं ताकि दर्शकों के सामने कुछ नया पेश कर सकें।
लल्लनटॉप में 'पीढ़ीगत बदलाव' का रिस्क
सौरभ के जाने के बाद कली पुरी ने इसे 'पीढ़ीगत बदलाव' (Generational Shift) का नाम दिया है। कुलदीप मिश्रा और रजत सैन जैसे पुराने साथियों को जिम्मेदारी सौंपना एक सोची-समझी रणनीति है ताकि ब्रांड की मूल पहचान बनी रहे। हालांकि, चुनौती यह है कि क्या लल्लनटॉप बिना सौरभ द्विवेदी के उसी लोकप्रियता और भरोसे को बरकरार रख पाएगा? क्योंकि लल्लनटॉप और सौरभ एक-दूसरे के पर्याय बन चुके थे। एक मंझे हुए रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो सौरभ द्विवेदी ने अपनी विदाई बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से ली है, जिससे उनके और इंडिया टुडे ग्रुप के संबंधों में कड़वाहट के बजाय सम्मान की झलक दिखती है। यह उनके भविष्य के स्वतंत्र सफर के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
Akhil Mahajan