बाप-बेटे की हिरासत में मौत , 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा, पढ़ें पूरी कहानी

कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। 2020 में जयराज और बेनिक्स की हिरासत में मौत हुई थी।

बाप-बेटे की हिरासत में मौत , 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा, पढ़ें  पूरी कहानी

साथानकुलम कस्टोडियल केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा
बाप-बेटे जयराज और बेनिक्स की हिरासत में हुई थी मौत
मदुरै कोर्ट ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए सुनाया ऐतिहासिक फैसला


चर्चित साथानकुलम कस्टोडियल किलिंग केस में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मदुरै जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2020 में हुई बाप-बेटे पी. जयराज और जे. बेनिक्स की हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला देशभर में चर्चित इस मामले में न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

पूरा मामला 19 जून 2020 का है, जब थूथुकुडी जिले के साथानकुलम में मोबाइल शॉप चलाने वाले पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने दुकान निर्धारित समय से अधिक देर तक खुली रखी थी। हालांकि बाद में यह आरोप गलत साबित हुआ।

गिरफ्तारी के बाद दोनों को पुलिस थाने में रखा गया, जहां उनके साथ क्रूर कस्टोडियल यातना किए जाने के आरोप सामने आए। परिजनों और गवाहों के अनुसार, दोनों को बुरी तरह पीटा गया। एक महिला कांस्टेबल की गवाही में सामने आया कि थाने में टेबल और लाठियों पर खून के निशान मौजूद थे, जो पुलिस अत्याचार की गंभीरता को दर्शाता है।

इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, लेकिन उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जून 2020 को बेनिक्स और 23 जून 2020 को जयराज की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी ने कुल 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया, जिनमें कई अधिकारी और कांस्टेबल शामिल थे। हालांकि एक आरोपी की जांच के दौरान कोविड-19 से मौत हो गई थी।

Timeline जानें कब क्‍या हुआ 

मदुरै की पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत के जज जी. मुथुकुमारन ने सुनवाई के बाद सभी 9 आरोपियों को हत्या सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। अदालत ने पाया कि पुलिस ने झूठे आरोप में गिरफ्तारी की और अमानवीय यातना देकर बाप-बेटे की हत्या कर दी। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि भविष्य में कस्टोडियल हिंसा के मामलों में कड़ा संदेश देने वाला भी माना जा रहा है।