राज्यसभा चुनाव: हरियाणा समेत 10 राज्यों की 37 सीटों पर प्रक्रिया शुरू, 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं जबकि हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर मतदान जारी है। NDA को कुल 8 सीटों का फायदा होने के आसार हैं।

➤ 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए प्रक्रिया शुरू
➤ 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए
➤ हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों पर वोटिंग जारी


देश की राजनीति के लिए अहम माने जा रहे राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया सोमवार सुबह 9 बजे से शुरू हो गई। इन चुनावों के तहत 10 राज्यों की कुल 37 सीटों के लिए मतदान और परिणाम की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतदान शाम 4 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी और देर शाम तक सभी सीटों की तस्वीर साफ हो जाएगी। इन चुनावों के नतीजे राज्यसभा में सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधनों की ताकत को प्रभावित कर सकते हैं।

उधर, हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सोमवार को विधानसभा परिसर में मतदान हो रहा है ।  CM सैनी ने पहला वोट डाला। चुनाव प्रक्रिया के तहत सुबह मतदान शुरू होगा और शाम 4 बजे तक वोटिंग चलेगी। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने पूरी तैयारी कर ली है और सभी की नजर क्रॉस वोटिंग की संभावना पर टिकी हुई है।

मतदान में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस के विधायक हिमाचल प्रदेश के हिमाचल  से चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। पार्टी ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पहले शिमला और फिर कसौली के होटल में ठहराया था, ताकि किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने विधायकों को सुबह 10 बजे एक साथ इकट्ठा होने के निर्देश दिए।

तीन उम्मीदवार मैदान में

हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए इस बार तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा भाजपा नेता सतीश नांदल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 कोटा वोट की जरूरत है। मौजूदा गणित के अनुसार कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि अगर क्रॉस वोटिंग होती है या किसी का वोट रद्द होता है तो समीकरण बदल सकते हैं और इसका फायदा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मिल सकता है।  विधानसभा का बजट सत्र भी सोमवार दोपहर 2 बजे से शुरू होगा। माना जा रहा है कि इससे पहले ही सभी विधायक अपना वोट डाल देंगे और फिर सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

भाजपा ने विधायकों को दी ट्रेनिंग

राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपने विधायकों को चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल जेडब्ल्यू मैरियट में दो दिन की विशेष ट्रेनिंग दी। 14 और 15 मार्च को आयोजित इस ट्रेनिंग में विधायकों के छह सेशन लगाए गए। इन सत्रों के दौरान वोटिंग की प्रक्रिया समझाई गई और अभ्यास भी कराया गया। एक अभ्यास सत्र में तीन विधायकों के वोट रद्द हो गए थे, जिसके बाद दोबारा अभ्यास कराया गया और विधायकों ने सही तरीके से वोटिंग की। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से मंत्री अनिल विज इस ट्रेनिंग में शामिल नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद वह आज वोट डालने विधानसभा पहुंचेंगे।

कांग्रेस ने शिमला में कराई रिहर्सल

कांग्रेस ने भी चुनाव को लेकर पहले से रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। पार्टी ने 13 मार्च को अपने 31 विधायकों को शिमला के गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया था। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित छह विधायक अलग-अलग कारणों से वहां नहीं गए थे। होटल में ही विधायकों को वोटिंग की पूरी प्रक्रिया की रिहर्सल कराई गई, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की गलती न हो। इसके बाद 14 मार्च को कांग्रेस ने अपने विधायकों को शिमला से सोलन जिले के कसौली में शिफ्ट कर दिया। कसौली चंडीगढ़ से लगभग 60 किलोमीटर दूर है, जिससे विधायक समय पर विधानसभा पहुंच सकें।

नांदल की उम्मीद क्रॉस वोटिंग पर

निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के साथ तीन अन्य निर्दलीय विधायक—देवेंद्र कादियान, सावित्री जिंदल और राजेश जून खड़े बताए जा रहे हैं। नांदल का दावा है कि कांग्रेस के करीब 10 विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि भाजपा के कुछ विधायक भी उनका समर्थन कर सकते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नांदल की जीत पूरी तरह क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगी।

NDA को मिल सकता है फायदा

मौजूदा स्थिति में जिन 37 सीटों पर चुनाव प्रक्रिया चल रही है, उनमें से पहले 25 सीटें INDIA गठबंधन के पास थीं, जबकि 12 सीटें NDA के खाते में थीं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार चुनाव के बाद तस्वीर बदल सकती है और NDA को कुल 8 सीटों का फायदा होने की संभावना जताई जा रही है। निर्विरोध चुनी गई 26 सीटों में NDA और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली हैं। पहले इन सीटों में NDA के पास 8 सीटें थीं, लेकिन अब चुनाव के बाद यह संख्या बढ़कर 13 हो सकती है, यानी उसे 5 सीटों का फायदा मिला है। वहीं हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 सीटों में पहले NDA के पास 4 सीटें थीं। मौजूदा समीकरणों के आधार पर यहां उसे 7 सीटें मिल सकती हैं। इस तरह इन राज्यों में NDA को 3 सीटों का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।

हरियाणा में रोचक मुकाबला

हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में से राज्यसभा की 2 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, लेकिन मैदान में 3 उम्मीदवार हैं। जीत के लिए 31 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास 48 विधायक हैं, इसलिए उसके उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। भाजपा के पास 7 वोट अतिरिक्त बचते हैं, जो निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को जा सकते हैं। अगर तीन निर्दलीय और इनेलो के दो विधायक उनका समर्थन करते हैं तो यह संख्या 22 तक पहुंच सकती है, जो जीत के लिए जरूरी 31 वोट से 9 कम है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। यदि सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को 31 से अधिक वोट मिल सकते हैं। हालांकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर भी बना हुआ है। हरियाणा में पहले भी ऐसा हो चुका है कि पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनावों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी।

बिहार में 5 सीटों पर मुकाबला

बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और यहां राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इन सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में NDA के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। गणित के अनुसार NDA को 4 सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। एक सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी हैं। चार सीटें जीतने के लिए NDA को 164 वोट की जरूरत होगी, जिसके बाद उसके पास 38 विधायक बचेंगे। पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। अगर उसे AIMIM के 5 विधायक और BSP का समर्थन मिल जाता है तो वह एक सीट जीत सकता है।

ओडिशा में चौथी सीट पर मुकाबला

ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सीटें हैं और यहां राज्यसभा की 4 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। हालांकि मैदान में 5 उम्मीदवार हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां एक सीट जीतने के लिए 30 विधायकों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के दो उम्मीदवार मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बीजेडी के पास 48 वोट हैं और उसने दो उम्मीदवार उतारे हैं—संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता। मिश्रा की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही है, लेकिन चौथी सीट पर मुकाबला फंसा हुआ है। कांग्रेस के 14 विधायक और माकपा का एक विधायक होता के पक्ष में बताए जा रहे हैं। क्रॉस वोटिंग होने की स्थिति में नतीजे पलट भी सकते हैं।

यहां चुने जा चुके हैं निर्विरोध