पानीपत गैंगरेप केस में बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद

पानीपत गैंगरेप मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। पीड़िता के मुकरने के बावजूद मोबाइल वीडियो और DNA रिपोर्ट सबसे बड़े सबूत बने।

पानीपत गैंगरेप केस में बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद
  • गैंगरेप केस में दो दोषियों को उम्रकैद
  • पीड़िता मुकर गई, लेकिन वीडियो बनी सबसे बड़ा सबूत
  • DNA रिपोर्ट और मोबाइल वीडियो से कोर्ट ने सुनाई सजा

पानीपत की एडिशनल सेशन जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के एक सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषियों पर 36 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

इस मामले की सबसे अहम बात यह रही कि केस की सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गई थी। इसके बावजूद अदालत ने पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों और वीडियो रिकॉर्डिंग को सबसे मजबूत आधार मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

जानकारी के अनुसार यह मामला 24 अप्रैल 2024 का है। अंबाला कैंट निवासी एक महिला अपने पति के साथ जीटी रोड पर खड़ी थी। इसी दौरान टेम्पू में सवार दो युवक वहां पहुंचे। आरोपियों की पहचान सुमित और रोहित के रूप में हुई। दोनों ने पति-पत्नी को छोड़ने के बहाने अपने वाहन में बैठाने का प्रयास किया।

जब पति ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और महिला को जबरन अगवा कर लिया। इसके बाद आरोपी महिला को मच्छरोली गांव के खेतों में बने एक कमरे में ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

हैरानी की बात यह रही कि वारदात के दौरान आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से महिला की पांच वीडियो भी रिकॉर्ड की थीं। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन भी बरामद किए।

साइबर लैब में मोबाइल की जांच कराई गई तो उसमें से गैंगरेप की पांचों वीडियो बरामद हो गईं। यही वीडियो बाद में अदालत में सबसे मजबूत साक्ष्य बनकर सामने आईं। पुलिस ने वीडियो के साथ-साथ FSL मधुबन की DNA रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की।

ट्रायल के दौरान पीड़िता ने अदालत में आरोपियों की पहचान करने से इनकार कर दिया और अपने पुराने बयान से मुकर गई। आमतौर पर ऐसे मामलों में गवाही कमजोर पड़ने पर आरोपी बच निकलते हैं, लेकिन इस केस में वैज्ञानिक जांच और डिजिटल सबूत निर्णायक साबित हुए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अम्बरदीप सिंह ने अपने फैसले में माना कि मोबाइल से बरामद वीडियो और DNA रिपोर्ट इतने मजबूत और स्पष्ट साक्ष्य हैं कि पीड़िता के मुकरने के बावजूद अपराध सिद्ध होता है। अदालत ने दोनों दोषियों को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

इस फैसले को डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय व्यवस्था की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और साइबर फॉरेंसिक जांच अब गंभीर अपराधों में अहम भूमिका निभा रही है।